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    श्री राम जय राम जय जय राम

    Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram

    108 बार जप करें

    तेरह अक्षरों का राम मंत्र, जिसे समर्थ रामदास ने फैलाया।

    प्रकार
    नाम जप
    देवता
    भगवान राम
    जप संख्या
    108 (एक माला)

    अर्थ

    श्री राम, राम की जय हो, राम की जय हो। इसमें तेरह अक्षर हैं, इसलिए इसे त्रयोदशाक्षरी मंत्र भी कहा जाता है।

    परिचय

    सत्रहवीं सदी में समर्थ रामदास स्वामी ने महाराष्ट्र में इस मंत्र का ख़ूब प्रचार किया। बीसवीं सदी में केरल के आनंदाश्रम वाले स्वामी रामदास, जिन्हें लोग "पापा रामदास" कहते थे, ने इसे अपने जीवन का केंद्र बना लिया, और उनके आश्रम में आज भी यही नाम गूँजता है। इसकी लय ऐसी है कि लोग ताली बजाते हुए इसे मिलकर गाते हैं।

    जप कैसे करें

    अकेले हों तो माला पर, साथ में हों तो ताली या मंजीरे के साथ। इसे गाकर बोलना बहुत स्वाभाविक लगता है।

    कब जपें: सुबह, मंगलवार और रामनवमी।

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    108 बार जप करें

    लोग अक्सर पूछते हैं

    सत्रहवीं सदी के महाराष्ट्र के संत, जिन्होंने "दासबोध" लिखा। परंपरा उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज का आध्यात्मिक गुरु मानती है।

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