अर्थ
श्री राम, राम की जय हो, राम की जय हो। इसमें तेरह अक्षर हैं, इसलिए इसे त्रयोदशाक्षरी मंत्र भी कहा जाता है।
परिचय
सत्रहवीं सदी में समर्थ रामदास स्वामी ने महाराष्ट्र में इस मंत्र का ख़ूब प्रचार किया। बीसवीं सदी में केरल के आनंदाश्रम वाले स्वामी रामदास, जिन्हें लोग "पापा रामदास" कहते थे, ने इसे अपने जीवन का केंद्र बना लिया, और उनके आश्रम में आज भी यही नाम गूँजता है। इसकी लय ऐसी है कि लोग ताली बजाते हुए इसे मिलकर गाते हैं।
जप कैसे करें
अकेले हों तो माला पर, साथ में हों तो ताली या मंजीरे के साथ। इसे गाकर बोलना बहुत स्वाभाविक लगता है।
कब जपें: सुबह, मंगलवार और रामनवमी।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।