स्तोत्र
    Kali Stotram

    काली स्तोत्र

    Kali Stotram

    खड्गं चक्रगदेषुचापपरिघाञ्छूलं भुशुण्डीं शिरः
    शङ्खं सन्दधतीं करैस्त्रिनयनां सर्वाङ्गभूषावृताम्।
    नीलाश्मद्युतिमास्यपाददशकां सेवे महाकालिकां
    यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम्॥
    
    या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः
    पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः।
    श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा
    तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
    
    विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं
    विश्वात्मिका धारयसीह विश्वम्।
    विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति
    विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥
    
    या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
    
    या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
    
    या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
    
    सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
    शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

    ये सभी श्लोक दुर्गा सप्तशती से लिए गए हैं। इन्हें यहाँ महाकाली की स्तुति के रूप में एक साथ रखा गया है; ये अपने आप में कोई अलग स्वतंत्र स्तोत्र नहीं हैं।

    अर्थ

    यह स्तुति दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के श्लोकों से बनी है। पहला श्लोक महाकाली का ध्यान है, जिसमें दस मुख, दस भुजाओं और दस चरणों वाली, नीलमणि जैसी कांति वाली देवी का वर्णन है, जिनकी स्तुति ब्रह्मा जी ने मधु और कैटभ के वध के लिए की थी। उसके बाद अध्याय चार का "या श्रीः स्वयं सुकृतिनां", अध्याय ग्यारह का "विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं", अध्याय पाँच के "या देवी सर्वभूतेषु" वाले तीन श्लोक और अंत में "सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये" आता है।

    लाभ

    • 🪷भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा हेतु पाठ किया जाता है
    • 🪷आंतरिक साहस और दृढ़ता का विकास होता है
    • 🪷शक्ति उपासकों और तांत्रिक साधना में विशेष स्थान रखता है
    • 🪷काली पूजा और नवरात्रि में विशेष रूप से पढ़ा जाता है

    जप/पाठ विधि

    रात्रि या संध्या समय देवी काली के चित्र के सामने दीपक जलाकर, शांत व स्थिर मन से पाठ करें। तांत्रिक परंपरा में इसे विशेष विधि-विधान से गुरु मार्गदर्शन में किया जाता है, पर सामान्य श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक कभी भी पाठ कर सकते हैं।

    सर्वोत्तम समय

    संध्या या रात्रि का समय तथा काली पूजा एवं नवरात्रि विशेष शुभ मानी जाती है।

    FAQ

    कोई भी श्रद्धालु जो देवी काली के प्रति भक्ति भाव रखता है, इसे पढ़ सकता है। गहन तांत्रिक साधना के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित माना जाता है।