
दुर्गा स्तोत्र
Durga Stotram
माँ दुर्गा की सभी सामग्री देखें →या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां च अखिलेषु या। भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेवि नमो नमः॥ चित्तेन हृदयं यस्याः सर्वभूतमयं जगत्। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥ नारायणि नमोऽस्तुते। नारायणि नमोऽस्तुते। नारायणि नमोऽस्तुते॥
अर्थ
यह स्तोत्र मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत आने वाले 'दुर्गा सप्तशती' (देवी माहात्म्य) से लिया गया है, जिसे 'देवी सूक्तम्' या 'या देवी सर्वभूतेषु' के नाम से जाना जाता है। इसमें देवी को समस्त प्राणियों में शक्ति, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, छाया, तृष्णा, कांति, लक्ष्मी, लज्जा, शांति, श्रद्धा, दया और मातृ रूप में विद्यमान बताया गया है। यह स्तोत्र देवी को हर जीव के भीतर व्याप्त सूक्ष्म शक्तियों के रूप में नमन करता है।
लाभ
- 🪷नवरात्रि और दुर्गा पूजा में विशेष रूप से पाठ किया जाता है
- 🪷मन में सकारात्मकता और आंतरिक शक्ति का संचार होता है
- 🪷भय और मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक माना जाता है
- 🪷स्त्री शक्ति और मातृ रूप के प्रति श्रद्धा भाव जागृत होता है
- 🪷दुर्गा सप्तशती पाठ से पहले इसका जप शुभ माना जाता है
जप/पाठ विधि
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएं। शांत मन से स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें। नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
सर्वोत्तम समय
नवरात्रि के दिन सर्वोत्तम माने जाते हैं। इसके अलावा प्रातःकाल या संध्या समय भी उपयुक्त है।
FAQ
यह मार्कण्डेय पुराण के देवी माहात्म्यम् (दुर्गा सप्तशती) का एक प्रसिद्ध अंश है।
हाँ, इसे किसी भी दिन श्रद्धापूर्वक पढ़ा जा सकता है; नवरात्रि में इसका विशेष महत्व है।