20 अक्टूबर
विजयादशमी (दशहरा)
असत्य पर सत्य की विजय — रावण दहन व शस्त्र पूजा का पर्व
इतिहास
विजयादशमी शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन मनाई जाती है। उत्तर भारत में इस दिन को भगवान राम द्वारा रावण वध की विजय के रूप में मनाया जाता है, जहाँ रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के विशाल पुतले जलाए जाते हैं (रावण दहन)। पूर्वी भारत, विशेषकर बंगाल में, यही दिन देवी दुर्गा के महिषासुर वध व कैलाश वापसी (विसर्जन) के उत्सव के रूप में मनाया जाता है — दोनों परंपराएँ असत्य/अधर्म पर सत्य/धर्म की विजय का सामान्य संदेश साझा करती हैं।
महत्व
यह दिन शुभ कार्यों, नई शुरुआत व विद्या-आरंभ (विद्यारंभम्) के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। परंपरागत रूप से इसी दिन "शस्त्र पूजा" (अस्त्र-शस्त्रों की पूजा) की जाती है, विशेषकर क्षत्रिय व सैन्य परंपराओं में।
पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर देवी दुर्गा व भगवान राम की पूजा करें। शमी वृक्ष के पत्तों का आदान-प्रदान शुभता के प्रतीक स्वरूप किया जाता है। सायंकाल रावण दहन देखने व "अपराजिता पूजा" करने की परंपरा है, जो विजय का प्रतीक मानी जाती है।
मुहूर्त
विजय मुहूर्त (दोपहर के आसपास का अभिजित काल) शुभ कार्यों के आरंभ हेतु विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सटीक समय हेतु स्थानीय पंचांग देखें।
आज का पंचांग देखें →क्या करें व क्या न करें
✅ क्या करें
- • प्रातः स्नान कर देवी दुर्गा व भगवान राम की आराधना करें
- • शस्त्र, वाहन व औजारों की पूजा करें
- • नई शुरुआत — व्यवसाय, विद्या-आरंभ — हेतु यह दिन उपयुक्त मानें
❌ क्या न करें
- • इस दिन नकारात्मक विचारों व वाद-विवाद से बचें
- • मांस-मदिरा का सेवन वर्जित माना जाता है