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    19 अक्टूबर

    दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी)

    नवरात्रि का सर्वाधिक शक्तिशाली दिन — देवी महागौरी व कन्या पूजन का पर्व

    ⏳ 63 दिन शेष (2026)

    इतिहास

    दुर्गा अष्टमी शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन मनाई जाती है, जब देवी दुर्गा के "महागौरी" स्वरूप की पूजा की जाती है। बंगाल में इसे "महाअष्टमी" कहा जाता है, जो दुर्गा पूजा उत्सव का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जब "संधि पूजा" (अष्टमी व नवमी के संधिकाल में होने वाली विशेष पूजा) की जाती है, जो देवी दुर्गा द्वारा असुर चंड-मुंड के वध का प्रतीक मानी जाती है।

    महत्व

    इस दिन "कन्या पूजन" की व्यापक परंपरा है, जिसमें नौ छोटी कन्याओं को देवी के नौ स्वरूपों के प्रतीक स्वरूप भोजन कराया जाता है व उनका सम्मान किया जाता है — यह स्त्री-शक्ति के सम्मान का प्रत्यक्ष प्रतीक माना जाता है।

    पूजा विधि

    देवी महागौरी की विधिवत पूजा करें, हवन करें, व कन्या पूजन कर नौ कन्याओं को भोजन व उपहार भेंट करें। बंगाल में इस दिन संधि पूजा के समय 108 दीप व कमल पुष्प अर्पित करने की परंपरा है।

    मुहूर्त

    संधि पूजा का सटीक समय अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट व नवमी तिथि के प्रथम 24 मिनट को मिलाकर तय होता है; स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

    आज का पंचांग देखें →

    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • देवी महागौरी की पूजा व हवन करें
    • कन्या पूजन अवश्य करें
    • बंगाल परंपरा में संधि पूजा में सम्मिलित हों

    ❌ क्या न करें

    • कन्याओं के प्रति अनादर या उपेक्षा न दिखाएं

    FAQ

    यह अष्टमी तिथि की समाप्ति व नवमी तिथि के आरंभ के संधिकाल (48 मिनट) में की जाने वाली विशेष पूजा है, जिसे देवी दुर्गा द्वारा चंड-मुंड असुरों के वध का सर्वाधिक शक्तिशाली क्षण माना जाता है।