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    प्रसिद्ध मंदिर

    श्री राधा रानी मंदिर, बरसाना (श्रीजी मंदिर)

    बरसाना, मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश

    राधा रानी का जन्मस्थान माना जाने वाला नगर — भानुगढ़ पहाड़ी पर स्थित मंदिर, विश्वप्रसिद्ध लठमार होली के लिए प्रसिद्ध

    एक नज़र में

    स्थान
    बरसाना, मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश
    आराध्य
    श्री राधा रानी (लाड़ली जी) व भगवान कृष्ण
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    वैष्णव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    मथुरा जंक्शन (लगभग 50 किमी); कोसी कलां रेलवे स्टेशन निकटतम है (लगभग 20 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    आगरा हवाई अड्डा (लगभग 95 किमी); इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली (लगभग 120 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च सामान्य दर्शन हेतु उत्तम; होली के आसपास लठमार होली उत्सव देखने के लिए विशेष रूप से आना चाहिए, परंतु उस समय अत्यधिक भीड़ रहती है।

    इतिहास

    बरसाना को भक्ति-परंपरा में राधा रानी का जन्मस्थान व बाल्यकाल का घर माना जाता है। यहाँ का मुख्य मंदिर — जिसे श्रीजी मंदिर, राधा रानी मंदिर या लाड़ली जी मंदिर कहा जाता है — भानुगढ़ (ब्रह्माचल) नामक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है और वहाँ तक सैकड़ों सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचा जाता है। अधिकांश कृष्ण-केंद्रित मंदिरों के विपरीत, यहाँ राधा रानी को प्रधान देवी के रूप में पूजा जाता है, और भगवान कृष्ण उनके साथ गौण रूप में विराजमान हैं — यह इस मंदिर की सबसे विशिष्ट पहचान है।

    धार्मिक महत्व

    बरसाना विश्वभर में "लठमार होली" के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें बरसाना की महिलाएँ पड़ोसी गाँव नंदगाँव (कृष्ण का गाँव, लगभग 9 किमी दूर) से आए पुरुषों को परंपरागत रूप से लाठियों से खेल-खेल में पीटती हैं — यह कृष्ण द्वारा राधा व गोपियों को छेड़ने की लीला का स्मरण कराता है। अगले दिन नंदगाँव में यही उत्सव भूमिका बदलकर मनाया जाता है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः 5:00 से दोपहर 12:00 और सायं 4:00 से रात्रि 8:00 तक (लगभग; ऋतु व उत्सव अनुसार परिवर्तन संभव)।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    मथुरा या वृंदावन से बरसाना सड़क मार्ग द्वारा लगभग 1-1.5 घंटे में पहुँचा जा सकता है; कोसी कलां रेलवे स्टेशन (दिल्ली-मुंबई मार्ग पर) से भी ऑटो/टैक्सी उपलब्ध रहते हैं। मंदिर तक पहुँचने हेतु पहाड़ी की सीढ़ियाँ पैदल चढ़नी होती हैं।

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    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    यह मंदिर मुख्य रूप से राधा रानी (लाड़ली जी) को समर्पित है, जिन्हें यहाँ प्रधान देवी के रूप में पूजा जाता है, जबकि भगवान कृष्ण उनके साथ गौण रूप में विराजमान हैं — जो अधिकांश अन्य मंदिरों से भिन्न है।

    लठमार होली बरसाना का एक विश्वप्रसिद्ध उत्सव है, जो होली के कुछ दिन पूर्व मनाया जाता है। इसमें बरसाना की महिलाएँ नंदगाँव से आए पुरुषों को परंपरागत रूप से लाठियों से खेल-खेल में पीटती हैं, जो कृष्ण-राधा की छेड़छाड़ की लीला का स्मरण कराता है।