ज्योतिर्लिंग
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
मोक्षदायिनी काशी में गंगा तट पर विराजमान विश्वनाथ
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
इतिहास
काशी विश्वनाथ मंदिर विश्व के सबसे प्राचीन व निरंतर पूजित तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। वर्तमान मंदिर संरचना का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया, जबकि इसका प्रसिद्ध स्वर्ण शिखर 1839 में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा प्रदान किए गए सोने से बना। 2019-2021 के मध्य श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर परियोजना के तहत मंदिर को गंगा घाट से सीधे जोड़ते हुए भव्य रूप से पुनर्विकसित किया गया, जिसका उद्घाटन दिसंबर 2021 में हुआ।
महत्व
काशी (वाराणसी) को हिंदू धर्म में मोक्ष प्रदान करने वाली सात पुरियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, और यहाँ देहत्याग करना मोक्ष का द्वार माना जाता है। विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ मणिकर्णिका घाट व दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती भी इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा हैं।
निकटतम रेलवे स्टेशन
वाराणसी जंक्शन / वाराणसी कैंट (मंदिर से लगभग 4-5 किमी)
निकटतम हवाई अड्डा
लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी (लगभग 24 किमी)
दर्शन समय
प्रातः 2:30/3:00 बजे मंगला आरती से रात्रि श्रृंगार/शयन आरती तक (लगभग 11:00 बजे रात्रि), दिन भर सामान्य दर्शन खुला।
सर्वोत्तम समय
अक्टूबर से मार्च; श्रावण मास व महाशिवरात्रि पर अत्यधिक भीड़ रहती है।
कैसे पहुँचें
वाराणसी जंक्शन देश के सभी प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेनों द्वारा जुड़ा है। स्टेशन या हवाई अड्डे से मंदिर तक ऑटो, ई-रिक्शा व टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं; कॉरिडोर बनने के बाद गंगा घाट से भी सीधा पैदल मार्ग है।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।