मंदिर सूची

    शक्तिपीठ

    विंध्यवासिनी शक्तिपीठ

    गंगा तट पर बसी वह देवी, जो कृष्ण जन्म के समय कंस के हाथों से मुक्त होकर आकाश में विलीन हो गईं

    विंध्याचल, मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश

    इतिहास

    विंध्याचल मंदिर मिर्जापुर के निकट गंगा तट पर स्थित है और देवी भागवत पुराण की कथा से जुड़ा है — जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, वासुदेव ने उन्हें गोकुल में यशोदा के पास पहुँचाया और बदले में एक कन्या (योगमाया) को कंस के पास छोड़ आए। जब कंस ने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, वह उसके हाथों से छूटकर आकाश में विलीन हो गई और देवी विंध्यवासिनी के रूप में यहाँ प्रकट हुई। यह क्षेत्र त्रिकोण परिक्रमा (विंध्यवासिनी, अष्टभुजा, काली खोह) के लिए प्रसिद्ध है।

    महत्व

    विंध्यवासिनी देवी की परिक्रमा में तीन मंदिरों — विंध्यवासिनी (सत्व), अष्टभुजा (रज) और काली खोह (तम) — के दर्शन को त्रिकोण यात्रा कहा जाता है, जो देवी के त्रिगुणात्मक स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है।

    निकटतम रेलवे स्टेशन

    विंध्याचल रेलवे स्टेशन (मंदिर से लगभग 1 किमी); मिर्जापुर रेलवे स्टेशन (लगभग 9 किमी, अधिक ट्रेनें)

    निकटतम हवाई अड्डा

    लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी (लगभग 75 किमी)

    दर्शन समय

    प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक।

    सर्वोत्तम समय

    अक्टूबर से मार्च; नवरात्रि में यहाँ विशाल मेला व भीड़ रहती है।

    कैसे पहुँचें

    विंध्याचल स्टेशन वाराणसी व इलाहाबाद (प्रयागराज) मार्ग पर स्थित है; स्टेशन से मंदिर तक पैदल या ऑटो द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

    नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।

    FAQ

    यह विंध्यवासिनी, अष्टभुजा व काली खोह — तीन मंदिरों के दर्शन का पारंपरिक क्रम है, जिसे देवी के सत्व, रज व तम रूपों की एक साथ पूजा माना जाता है।