शक्तिपीठ
छिन्नमस्तिका (छिन्तपूर्णी) शक्तिपीठ
चिंताओं को हरने वाली देवी, दस महाविद्याओं में से एक का पीठ
ऊना जिला, हिमाचल प्रदेश
इतिहास
छिन्तपूर्णी मंदिर देवी छिन्नमस्तिका को समर्पित है, जो दस महाविद्याओं में से एक हैं। मान्यता है कि यहाँ सती के चरण (पैर) गिरे थे। मंदिर का नाम "चिंतपूर्णी" इसलिए पड़ा क्योंकि माना जाता है कि यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर चिंता (मनोकामना) पूर्ण होती है। मंदिर में देवी की पिंडी स्वरूप में पूजा होती है, पारंपरिक मूर्ति स्वरूप में नहीं।
महत्व
यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के "शक्तिपीठ त्रिकोण" (ज्वालामुखी, चिंतपूर्णी, नैना देवी) का हिस्सा है, और तीनों को अक्सर एक ही यात्रा में शामिल किया जाता है।
निकटतम रेलवे स्टेशन
अंब अंदौरा रेलवे स्टेशन (लगभग 20-21 किमी); ऊना हिमाचल रेलवे स्टेशन (लगभग 54 किमी, अधिक ट्रेनें)
निकटतम हवाई अड्डा
गग्गल हवाई अड्डा, कांगड़ा (लगभग 70 किमी)
दर्शन समय
प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक।
सर्वोत्तम समय
मार्च-अप्रैल व सितंबर-अक्टूबर नवरात्रि के दौरान विशेष रौनक रहती है।
कैसे पहुँचें
अंब अंदौरा स्टेशन से टैक्सी व बस द्वारा लगभग 30-40 मिनट में मंदिर पहुँचा जा सकता है। यह ज्वालामुखी व नैना देवी से भी सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है, जिससे एक ही यात्रा में तीनों शक्तिपीठ कवर किए जा सकते हैं।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।