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    प्रसिद्ध मंदिर

    श्री द्वारकाधीश मंदिर

    द्वारका, गुजरात

    चार धाम में पश्चिम का धाम — भगवान कृष्ण की ऐतिहासिक राजधानी

    एक नज़र में

    स्थान
    द्वारका, गुजरात
    आराध्य
    भगवान द्वारकाधीश (कृष्ण)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    वैष्णव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    द्वारका रेलवे स्टेशन (लगभग 2-3 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    जामनगर हवाई अड्डा (लगभग 137 किमी); पोरबंदर हवाई अड्डा (लगभग 105 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च; जन्माष्टमी पर विशेष भव्य उत्सव मनाया जाता है।

    इतिहास

    द्वारकाधीश मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है और आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार धामों में पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करता है। मान्यता है कि यह वही स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद अपनी राजधानी स्थापित की थी। वर्तमान मंदिर की पाँच मंजिला संरचना लगभग 16वीं शताब्दी की मानी जाती है, यद्यपि मूल मंदिर की उत्पत्ति कहीं अधिक प्राचीन मानी जाती है। मंदिर का ध्वज दिन में पाँच बार बदला जाता है।

    धार्मिक महत्व

    द्वारका शहर स्वयं सप्तपुरियों (सात मोक्षदायिनी नगरियों) में से एक है, और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की निकटता के कारण श्रद्धालु प्रायः दोनों स्थलों की यात्रा एक साथ करते हैं।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः 6:30 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक (मध्याह्न में संक्षिप्त विराम)।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    द्वारका रेलवे स्टेशन अहमदाबाद व अन्य गुजरात शहरों से जुड़ा है; स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व पैदल दोनों विकल्प सुगमता से उपलब्ध हैं।

    श्री कृष्ण की भक्ति आगे बढ़ाएँ

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    सामान्य प्रश्न

    मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज परंपरा अनुसार दिन में पाँच बार बदला जाता है, और भक्त इस ध्वज हेतु कपड़ा दान करना विशेष पुण्यदायी मानते हैं।