ज्योतिर्लिंग
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिला, एलोरा के निकट, महाराष्ट्र
बारहवाँ व अंतिम ज्योतिर्लिंग, विश्वप्रसिद्ध एलोरा गुफाओं के ठीक निकट
एक नज़र में
- स्थान
- छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिला, एलोरा के निकट, महाराष्ट्र
- आराध्य
- भगवान शिव
- श्रेणी
- ज्योतिर्लिंग
- परंपरा
- शैव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) रेलवे स्टेशन (लगभग 30 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- छत्रपति संभाजीनगर हवाई अड्डा (लगभग 35 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से मार्च; एलोरा गुफाओं के भ्रमण हेतु भी यही समय उपयुक्त है।
इतिहास
घृष्णेश्वर मंदिर एलोरा गुफाओं (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल) से मात्र लगभग 1 किमी की दूरी पर स्थित है। शिव पुराण की कथा के अनुसार घुश्मा नामक परम शिवभक्त स्त्री ने अपने पुत्र की मृत्यु पर भी शिव भक्ति नहीं त्यागी, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उसके पुत्र को पुनर्जीवित किया और वहीं ज्योतिर्लिंग रूप में सदा के लिए विराजमान हो गए — इसीलिए इसे "घृष्णेश्वर" या "घुश्मेश्वर" भी कहा जाता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण भी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा 18वीं शताब्दी में करवाया गया था।
धार्मिक महत्व
घृष्णेश्वर की यात्रा प्रायः एलोरा और अजंता गुफाओं के भ्रमण के साथ की जाती है, जिससे यह एक ही यात्रा में आध्यात्मिक व ऐतिहासिक-कला दोनों अनुभव प्रदान करता है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
प्रातः 5:30 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
औरंगाबाद रेलवे स्टेशन व हवाई अड्डे से घृष्णेश्वर व एलोरा तक टैक्सी व स्थानीय बस सेवा नियमित रूप से उपलब्ध है, यात्रा में लगभग 45 मिनट लगते हैं।
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