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    प्रसिद्ध मंदिर

    श्री राधा रमण मंदिर

    वृंदावन, मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश

    वृंदावन के सप्त देवालयों में से एक — स्वयंभू शालिग्राम शिला से प्रकट हुए विग्रह वाला मंदिर

    एक नज़र में

    स्थान
    वृंदावन, मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश
    आराध्य
    श्री राधा रमण जी (स्वयंभू शालिग्राम शिला से प्रकट)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    वैष्णव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    मथुरा जंक्शन (लगभग 14 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    आगरा हवाई अड्डा (लगभग 75 किमी); इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली (लगभग 160 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च; जन्माष्टमी के समय विशेष उत्सव मनाया जाता है।

    इतिहास

    राधा रमण मंदिर की स्थापना चैतन्य महाप्रभु के छह प्रमुख शिष्यों में से एक, गोपाल भट्ट गोस्वामी ने 16वीं शताब्दी में की थी। मान्यता है कि विग्रह किसी मूर्तिकार द्वारा नहीं गढ़ा गया, बल्कि एक शालिग्राम शिला से स्वयं प्रकट हुआ, इसलिए इस मंदिर में औपचारिक प्राण-प्रतिष्ठा संस्कार नहीं किया गया। मंदिर का संचालन आज भी गोपाल भट्ट गोस्वामी के वंशजों द्वारा किया जाता है।

    धार्मिक महत्व

    यह मंदिर वृंदावन के "सप्त देवालयों" (चैतन्य-परंपरा के सात मूल मंदिरों) में गिना जाता है और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में विशेष श्रद्धा का स्थान रखता है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः 5:00 से दोपहर 12:00 और सायं 4:30 से रात्रि 8:30 तक (लगभग)।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    मथुरा जंक्शन से ऑटो/टैक्सी द्वारा वृंदावन पहुँचकर, पुरानी वृंदावन बस्ती की संकरी गलियों से पैदल मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।

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    सामान्य प्रश्न

    मान्यता है कि यह विग्रह किसी मूर्तिकार द्वारा नहीं गढ़ा गया बल्कि एक शालिग्राम शिला से स्वयं प्रकट हुआ था, इसीलिए इसे स्वयंभू (स्वयं-प्रकट) माना जाता है और यहाँ कोई अलग राधा प्रतिमा नहीं है।