प्रसिद्ध मंदिर
श्री राधावल्लभ मंदिर
राधावल्लभ संप्रदाय का मूल मंदिर — जहाँ राधा जी को अलग मूर्ति के बजाय मुकुट रूप में पूजा जाता है
वृंदावन, मथुरा जिला, उत्तर प्रदेशदिशा-निर्देश (Google Maps)
इतिहास
राधावल्लभ मंदिर की स्थापना हित हरिवंश महाप्रभु ने 16वीं शताब्दी में की, जो राधावल्लभ संप्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं। इस मंदिर की सबसे विशिष्ट पहचान यह है कि यहाँ राधा जी की अलग मूर्ति नहीं है — कृष्ण विग्रह के बगल में एक स्वर्ण मुकुट स्थापित है, जो राधा जी की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा रचित "श्री हित चौरासी" इसी परंपरा की एक प्रमुख काव्य-रचना है।
महत्व
यह मंदिर राधावल्लभ संप्रदाय के अनुयायियों के लिए सर्वोच्च तीर्थ माना जाता है, और वृंदावन के सबसे पुराने जीवंत मंदिरों में गिना जाता है।
निकटतम रेलवे स्टेशन
मथुरा जंक्शन (लगभग 13 किमी)
निकटतम हवाई अड्डा
आगरा हवाई अड्डा (लगभग 74 किमी); इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली (लगभग 160 किमी)
दर्शन समय
प्रातः 5:30 से दोपहर 12:00 और सायं 5:00 से रात्रि 8:00 तक (लगभग)।
सर्वोत्तम समय
अक्टूबर से मार्च; होली व जन्माष्टमी के समय विशेष श्रृंगार व उत्सव होता है।
कैसे पहुँचें
मथुरा जंक्शन से वृंदावन तक ऑटो/टैक्सी द्वारा पहुँचकर, बांके बिहारी मंदिर मार्ग से पैदल राधावल्लभ मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।