ज्योतिर्लिंग
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
नासिक, महाराष्ट्र
गोदावरी नदी का उद्गम स्थल, जहाँ लिंग में तीन मुख विराजमान हैं
एक नज़र में
- स्थान
- नासिक, महाराष्ट्र
- आराध्य
- भगवान शिव
- श्रेणी
- ज्योतिर्लिंग
- परंपरा
- शैव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- नासिक रोड रेलवे स्टेशन (लगभग 28-30 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- नासिक हवाई अड्डा, ओझर (लगभग 40 किमी); मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 180 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से मार्च; कुंभ मेला वर्ष में यहाँ विशेष रूप से भारी भीड़ रहती है।
इतिहास
त्र्यंबकेश्वर मंदिर नासिक से लगभग 28 किमी दूर ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित है, जहाँ से गोदावरी नदी का उद्गम माना जाता है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि इसमें एक ही पत्थर में तीन छोटे-छोटे लिंग उकेरे गए हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव के प्रतीक माने जाते हैं। वर्तमान भव्य काले पत्थर का मंदिर 18वीं शताब्दी में पेशवा बालाजी बाजीराव द्वारा बनवाया गया था।
धार्मिक महत्व
त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेले के चार स्थलों में से एक (नासिक-त्र्यंबकेश्वर) का भाग है, और यहाँ नारायण-नागबली व कालसर्प दोष जैसी विशेष पूजाएँ कराई जाती हैं, जिनके लिए देशभर से भक्त आते हैं।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
प्रातः 5:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक; गर्भगृह में प्रवेश हेतु पारंपरिक (धोती/साड़ी जैसी) वेशभूषा आवश्यक है।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
नासिक रोड स्टेशन या नासिक शहर से त्र्यंबकेश्वर तक नियमित बसें व टैक्सी उपलब्ध हैं, यात्रा में लगभग 45 मिनट से 1 घंटा लगता है।
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