ज्योतिर्लिंग
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
'चिता भूमि' — जहाँ रावण ने अपना सिर अर्पित कर शिव को प्रसन्न किया
देवघर, झारखंड
इतिहास
देवघर स्थित वैद्यनाथ मंदिर की कथा रावण से जुड़ी है — उसने शिव को कैलाश से लंका ले जाने हेतु घोर तप किया, और अंततः अपने नौ सिर अर्पित करने के पश्चात शिव प्रसन्न होकर वैद्य (चिकित्सक) रूप में यहाँ प्रकट हुए और रावण को स्वस्थ कर दिया — इसीलिए इस ज्योतिर्लिंग को "वैद्यनाथ" कहा जाता है। यह स्थान श्रावणी मेला के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जहाँ लाखों "कांवड़िए" सुल्तानगंज से गंगाजल कंधे पर लेकर लगभग 105 किमी पैदल यात्रा (कांवड़ यात्रा) कर यहाँ जलाभिषेक करते हैं।
महत्व
वैद्यनाथ धाम को बारह ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र ऐसा स्थान माना जाता है जो साथ ही "कामना लिंग" (मनोकामना पूर्ण करने वाला) भी है। मंदिर परिसर में मुख्य वैद्यनाथ मंदिर के साथ माता पार्वती व अन्य देवी-देवताओं के 21 अन्य मंदिर भी हैं।
निकटतम रेलवे स्टेशन
जसीडीह जंक्शन (लगभग 7 किमी); देवघर रेलवे स्टेशन भी नगर में ही स्थित है
निकटतम हवाई अड्डा
देवघर हवाई अड्डा (लगभग 10 किमी)
दर्शन समय
प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (श्रावण मास में समय व नियम विशेष रूप से बदलते हैं)।
सर्वोत्तम समय
अक्टूबर से फरवरी सामान्य दर्शन हेतु उपयुक्त; श्रावण मास कांवड़ यात्रा के अनुभव के लिए, किंतु अत्यधिक भीड़भाड़ के साथ।
कैसे पहुँचें
जसीडीह जंक्शन कोलकाता, दिल्ली, पटना जैसे बड़े शहरों से जुड़ा है; वहाँ से ऑटो व टैक्सी द्वारा मंदिर आसानी से पहुँचा जा सकता है। श्रावण मास में सुल्तानगंज से पैदल कांवड़ यात्रा भी एक पारंपरिक विकल्प है।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।