प्रसिद्ध मंदिर
श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर, पंढरपुर
पंढरपुर, सोलापुर जिला, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की वारकरी भक्ति परंपरा का हृदयस्थल — 'दक्षिण की काशी'
एक नज़र में
- स्थान
- पंढरपुर, सोलापुर जिला, महाराष्ट्र
- आराध्य
- भगवान विठ्ठल (विष्णु/कृष्ण स्वरूप) व देवी रुक्मिणी
- श्रेणी
- प्रसिद्ध मंदिर
- परंपरा
- वैष्णव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- पंढरपुर रेलवे स्टेशन (लगभग 3 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- पुणे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 210 किमी); सोलापुर हवाई अड्डा (लगभग 72 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से फरवरी; आषाढ़ी एकादशी (जून-जुलाई) वारी यात्रा के अनुभव हेतु सर्वोत्तम किंतु अत्यंत भीड़भाड़ वाला समय है।
इतिहास
पंढरपुर का विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर चंद्रभागा नदी (भीमा नदी की सहायक) के तट पर स्थित है, और यह महाराष्ट्र की वारकरी संप्रदाय की भक्ति परंपरा का केंद्र माना जाता है। संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम व संत नामदेव जैसे कई भक्ति-कालीन संतों ने विठ्ठल भक्ति को व्यापक रूप से प्रचारित किया। मंदिर की उत्पत्ति 12वीं-13वीं शताब्दी के आसपास मानी जाती है।
धार्मिक महत्व
प्रत्येक वर्ष आषाढ़ी एकादशी पर लाखों "वारकरी" (पैदल तीर्थयात्री) आळंदी व देहू से पंढरपुर तक की पदयात्रा (वारी) करते हुए पहुँचते हैं — यह भारत की सबसे बड़ी पैदल तीर्थयात्राओं में गिनी जाती है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 11:30 बजे तक (आषाढ़ी एकादशी पर विशेष विस्तारित समय)।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
पंढरपुर रेलवे स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व टैक्सी सुगमता से उपलब्ध हैं; पुणे व सोलापुर से सीधी बस सेवा भी नियमित रूप से चलती है।
श्री कृष्ण की भक्ति आगे बढ़ाएँ
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