मंदिर सूची

    प्रसिद्ध मंदिर

    श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर, पंढरपुर

    महाराष्ट्र की वारकरी भक्ति परंपरा का हृदयस्थल — 'दक्षिण की काशी'

    पंढरपुर, सोलापुर जिला, महाराष्ट्र

    इतिहास

    पंढरपुर का विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर चंद्रभागा नदी (भीमा नदी की सहायक) के तट पर स्थित है, और यह महाराष्ट्र की वारकरी संप्रदाय की भक्ति परंपरा का केंद्र माना जाता है। संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम व संत नामदेव जैसे कई भक्ति-कालीन संतों ने विठ्ठल भक्ति को व्यापक रूप से प्रचारित किया। मंदिर की उत्पत्ति 12वीं-13वीं शताब्दी के आसपास मानी जाती है।

    महत्व

    प्रत्येक वर्ष आषाढ़ी एकादशी पर लाखों "वारकरी" (पैदल तीर्थयात्री) आळंदी व देहू से पंढरपुर तक की पदयात्रा (वारी) करते हुए पहुँचते हैं — यह भारत की सबसे बड़ी पैदल तीर्थयात्राओं में गिनी जाती है।

    निकटतम रेलवे स्टेशन

    पंढरपुर रेलवे स्टेशन (लगभग 3 किमी)

    निकटतम हवाई अड्डा

    पुणे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 210 किमी); सोलापुर हवाई अड्डा (लगभग 72 किमी)

    दर्शन समय

    प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 11:30 बजे तक (आषाढ़ी एकादशी पर विशेष विस्तारित समय)।

    सर्वोत्तम समय

    अक्टूबर से फरवरी; आषाढ़ी एकादशी (जून-जुलाई) वारी यात्रा के अनुभव हेतु सर्वोत्तम किंतु अत्यंत भीड़भाड़ वाला समय है।

    कैसे पहुँचें

    पंढरपुर रेलवे स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व टैक्सी सुगमता से उपलब्ध हैं; पुणे व सोलापुर से सीधी बस सेवा भी नियमित रूप से चलती है।

    नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।

    FAQ

    यह संत ज्ञानेश्वर व संत तुकाराम की पादुकाओं के साथ आळंदी व देहू से पंढरपुर तक की पारंपरिक पैदल तीर्थयात्रा है, जिसमें लाखों वारकरी भजन-कीर्तन करते हुए कई दिनों की यात्रा तय करते हैं।