11 नवंबर
भाई दूज
भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व, दीपावली पंचदिवसीय उत्सव का समापन
इतिहास
भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है और दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का समापन करता है। कथा के अनुसार यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर गए थे, जिन्होंने उनका तिलक कर आदरपूर्वक स्वागत किया — तभी से इस दिन बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु व कल्याण की कामना करती हैं।
महत्व
यह पर्व राखी (रक्षा बंधन) की भांति ही भाई-बहन के स्नेह का उत्सव है, किंतु इसमें भाई द्वारा बहन के घर जाकर भोजन ग्रहण करने व उपहार देने की विशेष परंपरा है।
पूजा विधि
बहनें भाई का तिलक कर आरती उतारें, मिठाई खिलाएं व दीर्घायु की कामना करें। भाई अपनी बहन को उपहार व आशीर्वाद स्वरूप कुछ भेंट अवश्य दें।
मुहूर्त
तिलक हेतु शुभ मुहूर्त सामान्यतः द्वितीया तिथि के मध्याह्न काल में होता है। सटीक समय हेतु पंचांग देखें।
आज का पंचांग देखें →क्या करें व क्या न करें
✅ क्या करें
- • बहन के घर जाकर तिलक करवाएं व भोजन करें
- • एक-दूसरे को उपहार व शुभकामनाएं दें
❌ क्या न करें
- • इस दिन भाई-बहनों के बीच विवाद व मनमुटाव से बचें