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    6 नवंबर

    धनतेरस

    दीपावली पर्व की शुरुआत — भगवान धन्वंतरि व कुबेर की पूजा का दिन

    ⏳ 81 दिन शेष (2026)

    इतिहास

    धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है और पाँच-दिवसीय दीपावली उत्सव का प्रथम दिन है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन को "राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस" के रूप में भी मनाया जाता है। परंपरा अनुसार इस दिन सोना, चाँदी, बर्तन व नए वस्त्र खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    महत्व

    संध्याकाल में घर के मुख्य द्वार पर यमराज हेतु दीपक जलाने की परंपरा है ("यम दीपक"), जो अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु मनाया जाता है। यह दिन धन-समृद्धि व स्वास्थ्य दोनों के आशीर्वाद हेतु समर्पित माना जाता है।

    पूजा विधि

    घर व दुकान की भलीभांति सफाई करें, प्रवेश द्वार पर रंगोली व दीप सजाएं। संध्याकाल में धन्वंतरि, कुबेर व माँ लक्ष्मी की पूजा करें, और नई खरीदारी (विशेषकर धातु की वस्तुएं) का विधिवत पूजन करें।

    मुहूर्त

    प्रदोष काल (सूर्यास्त के पश्चात् की अवधि) पूजा हेतु सर्वाधिक शुभ माना जाता है। सटीक मुहूर्त हेतु पंचांग देखें।

    आज का पंचांग देखें →

    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • घर व प्रतिष्ठान की गहन सफाई करें
    • धन्वंतरि व कुबेर की पूजा करें
    • संध्याकाल यम दीपक अवश्य जलाएं

    ❌ क्या न करें

    • इस दिन उधार देना या घर से पैसा बाहर भेजना अशुभ माना जाता है
    • घर में अव्यवस्था व गंदगी न रहने दें

    FAQ

    सोना, चाँदी, नए बर्तन (विशेषकर पीतल के) व झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये समृद्धि व माँ लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माने जाते हैं।