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    20 दिसंबर

    गीता जयंती

    कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में भगवद्गीता के उपदेश का स्मृति-पर्व

    ⏳ 125 दिन शेष (2026)

    इतिहास

    गीता जयंती मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, जिस दिन महाभारत युद्ध के आरंभ में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यह उपदेश कर्म, भक्ति व ज्ञान योग के समन्वित सिद्धांतों पर आधारित है, जो आज भी विश्वभर में जीवन-दर्शन के मार्गदर्शक ग्रंथ के रूप में पढ़ा जाता है।

    महत्व

    कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में इस दिन विशाल अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव आयोजित होता है, और विश्वभर के मंदिरों व आश्रमों में भगवद्गीता के सामूहिक पाठ का आयोजन होता है।

    पूजा विधि

    प्रातः स्नान कर भगवद्गीता का पाठ या श्रवण करें, भगवान कृष्ण की पूजा करें, और यथासंभव गीता के किसी एक अध्याय का अध्ययन व चिंतन करें।

    मुहूर्त

    एकादशी तिथि के दौरान दिन भर पाठ व पूजा शुभ मानी जाती है; सटीक तिथि हेतु पंचांग देखें।

    आज का पंचांग देखें →

    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • भगवद्गीता के किसी अध्याय का पाठ या श्रवण करें
    • भगवान कृष्ण की पूजा करें
    • गीता के उपदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लें

    ❌ क्या न करें

    • इस दिन ग्रंथ व शास्त्रों के प्रति अनादर न दिखाएं

    FAQ

    भगवद्गीता में कुल 18 अध्याय व लगभग 700 श्लोक हैं, जो कर्म योग, भक्ति योग व ज्ञान योग के सिद्धांतों का समग्र प्रतिपादन करते हैं।