स्तोत्र
    Krishna Kripa Kataksha Stotram

    कृष्ण कृपा कटाक्ष स्तोत्र

    Krishna Kripa Kataksha Stotram

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    मन्दं हसन्तं मधुरं वदन्तं
    गोविन्दकूलेषु विहारयन्तम्।
    मन्दस्मितं सुन्दरमम्बुजाक्षं
    कृष्णं नमामि जगतां निवासम्॥
    
    नीलोत्पलश्यामतनुं समस्त-
    लोकत्रयाकर्षण मोहनाङ्गम्।
    वंशीनिनादं शशिसुन्दराननं
    कृष्णं नमामि जगतां निवासम्॥
    
    पीताम्बरं भूषणभूषिताङ्गं
    प्रभासयन्तं जगदेककान्तम्।
    कदम्बवृन्दे विलसन्तमाद्यं
    कृष्णं नमामि जगतां निवासम्॥
    
    राधासहायं सुरलोकनाथं
    विलासिनीव्रततवृन्दवन्द्यम्।
    गोपालबालं मधुसूदनं तं
    कृष्णं नमामि जगतां निवासम्॥
    
    यत्पादपद्मं प्रणमन्ति देवा-
    स्तत्कर्ममुक्ताः सुखिनो भवन्ति।
    तं शारदाब्जं सरसीरुहाक्षं
    कृष्णं नमामि जगतां निवासम्॥
    
    एवं स्तुतः श्रीहरिरञ्जसा वै
    प्रसन्नचित्तो भवतीह नूनम्।
    ददाति भक्ताय मनोऽभिलषितं
    श्रीकृष्णचन्द्रः शरणागताय॥

    अर्थ

    यह स्तोत्र भगवान श्रीकृष्ण की मनोहर छवि की स्तुति है — मंद हास्य, मधुर वाणी, नीलकमल जैसी श्याम कांति, पीताम्बर और वंशी की मधुर ध्वनि। स्तोत्र में कृष्ण को राधा के सखा, गोपाल बालक और समस्त जगत के आश्रयदाता के रूप में नमन किया गया है। अंतिम श्लोक में कहा गया है कि जो भी इस स्तुति से भगवान की आराधना करता है, श्रीकृष्ण प्रसन्न होकर उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

    लाभ

    • 🪷भक्ति भाव और कृष्ण प्रेम को गहरा करता है
    • 🪷मन को शांति और आनंद की अनुभूति होती है
    • 🪷जन्माष्टमी और कृष्ण पूजा में विशेष रूप से गाया जाता है
    • 🪷श्रद्धापूर्वक पाठ से मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता है

    जप/पाठ विधि

    कृष्ण जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर, मधुर स्वर में भाव सहित पाठ करें। भजन-कीर्तन के साथ भी इसे गाया जा सकता है।

    सर्वोत्तम समय

    प्रातःकाल तथा जन्माष्टमी विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।

    FAQ

    यह किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु जन्माष्टमी और कृष्ण भक्ति के अवसरों पर विशेष रूप से गाया जाता है।