10 नवंबर
गोवर्धन पूजा
भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों की रक्षा का स्मृति-पर्व
इतिहास
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाती है, दीपावली के अगले दिन। कथा के अनुसार जब इंद्र देव ने गोकुलवासियों पर मूसलाधार वर्षा कर क्रोध प्रकट किया, तब बालक कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी अंगुली पर उठाकर सात दिनों तक पूरे गाँव की रक्षा की। इसी घटना की स्मृति में इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाकर पूजा की जाती है।
महत्व
इस दिन "अन्नकूट" उत्सव भी मनाया जाता है, जिसमें विविध प्रकार के पकवानों का विशाल भोग भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है, जो कृषि व गौ-धन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।
पूजा विधि
गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाएं, उसे फूलों व दीपों से सजाएं। अन्नकूट का भोग तैयार कर भगवान कृष्ण को अर्पित करें, और गौ-माता की विशेष पूजा करें।
मुहूर्त
पूजा प्रातःकाल या प्रतिपदा तिथि के दौरान की जाती है; सटीक समय हेतु स्थानीय पंचांग देखें।
आज का पंचांग देखें →क्या करें व क्या न करें
✅ क्या करें
- • गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाकर पूजा करें
- • गौ-माता की सेवा व पूजा करें
- • अन्नकूट भोग तैयार कर अर्पित करें
❌ क्या न करें
- • गौ-माता व पशुओं के प्रति असम्मान न दिखाएं