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    19 अप्रैल

    अक्षय तृतीया

    अक्षय फल देने वाला शुभ दिन

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    ⏳ 194 दिन शेष (2027)

    इतिहास

    अक्षय तृतीया वैशाख मास की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के परशुराम अवतार का जन्म हुआ था, और यह भी माना जाता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास ने गणेश जी को महाभारत कथा सुनानी आरंभ की थी। "अक्षय" का अर्थ है जो कभी क्षय न हो — इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल अक्षय (अविनाशी) माना जाता है।

    महत्व

    यह दिन बिना किसी मुहूर्त-विचार के प्रत्येक शुभ कार्य — विवाह, गृह प्रवेश, नई शुरुआत, स्वर्ण खरीद और दान — के लिए स्वयंसिद्ध शुभ मुहूर्त माना जाता है।

    पूजा विधि

    प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। यथाशक्ति दान करें — अन्न, वस्त्र या स्वर्ण। नए कार्य आरंभ करना, स्वर्ण या संपत्ति की खरीद इस दिन विशेष शुभ मानी जाती है।

    मंत्र

    ॐ विष्णवे नमः॥

    Om Vishnave Namah॥

    यह भगवान विष्णु को समर्पित मंत्र है, जो समृद्धि और शुभता की प्राप्ति हेतु जपा जाता है।

    मुहूर्त

    संपूर्ण दिन ही स्वयंसिद्ध शुभ मुहूर्त माना जाता है, अतः अलग मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।

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    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • • भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें
    • • स्वर्ण, संपत्ति या नई वस्तु की खरीद करें
    • • यथाशक्ति अन्न, वस्त्र या स्वर्ण का दान करें
    • • नए व्यापार या कार्य की शुरुआत करें

    ❌ क्या न करें

    • • इस दिन उधार लेन-देन से बचें
    • • अनावश्यक विवाद या वाद-विवाद न करें
    • • बिना सोचे-समझे बड़ा निवेश न करें
    • • जरूरतमंदों की उपेक्षा न करें

    FAQ

    'अक्षय' का अर्थ है जो घटे नहीं; मान्यता है कि इस दिन अर्जित धन-संपत्ति समय के साथ बढ़ती रहती है, इसलिए स्वर्ण व संपत्ति की खरीद को शुभ माना जाता है।