अर्थ
हम तीन नेत्रों वाले शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंध से भरे हैं और सबका पोषण करते हैं। जैसे पकी हुई ककड़ी बेल से अपने आप अलग हो जाती है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से छुड़ाइए, अमरता से नहीं।
परिचय
यह मंत्र ऋग्वेद के सातवें मंडल में है, जो ऋषि वसिष्ठ से जुड़ा है, और यजुर्वेद में भी दोहराया गया है। ककड़ी वाली उपमा इसका सबसे सुंदर हिस्सा है। पकी ककड़ी को तोड़ना नहीं पड़ता, वह ख़ुद छूट जाती है। मंत्र यही माँगता है कि बंधन सहजता से छूटें। घर में कोई बीमार हो तो परिवार के लोग इसे मिलकर जपते हैं, और कई मंदिरों में सवा लाख जप का अनुष्ठान होता है।
जप कैसे करें
इस मंत्र में उच्चारण बहुत मायने रखता है, इसलिए हो सके तो किसी जानकार से एक बार सुन लें। शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाते हुए रुद्राक्ष की माला पर जप करें। शुरू में धीमे बोलें, गति अपने आप आ जाएगी।
कब जपें: सुबह और प्रदोष काल। सोमवार और महाशिवरात्रि पर विशेष।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।