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    भगवान शिवनमस्कार मंत्र

    ॐ नमः शिवाय

    Om Namah Shivaya

    108 बार जप करें

    पाँच अक्षरों में पूरी शिव भक्ति।

    प्रकार
    नमस्कार मंत्र
    देवता
    भगवान शिव
    जप संख्या
    108 (एक माला)
    स्रोत
    श्री रुद्रम्, कृष्ण यजुर्वेद

    अर्थ

    सीधा अर्थ है, मैं शिव को नमन करता हूँ। ॐ हटा दें तो पाँच अक्षर बचते हैं: न, मः, शि, वा, य। इसी से इसे पंचाक्षर कहते हैं। शैव सिद्धांत में इन पाँच अक्षरों को पाँच तत्वों से भी जोड़ा गया है, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश।

    परिचय

    ये शब्द यजुर्वेद के श्री रुद्रम् से आते हैं, जहाँ पंक्ति है "नमः शिवाय च शिवतराय च"। समय के साथ यह छोटा-सा वाक्य अपने आप में मंत्र बन गया। तमिलनाडु में इसे "नमशिवाय" कहते हैं और तिरुमुरै के भजनों में यह बार-बार आता है। काशी के घाटों पर सुबह-शाम यही सुनाई देता है। इसके लिए किसी दीक्षा की शर्त नहीं, लोग बस शुरू कर देते हैं।

    जप कैसे करें

    शिवलिंग या शिव की तस्वीर के सामने बैठें, न हो तो कोई शांत कोना भी चलेगा। रुद्राक्ष की माला का चलन है। अक्षर जल्दी-जल्दी न बोलें, हर एक को पूरा उच्चारित करें। अगर जल या बेलपत्र चढ़ा रहे हैं, तो जप को उसी लय में चलने दें।

    कब जपें: किसी भी समय। सोमवार, प्रदोष की शाम और महाशिवरात्रि की रात का अलग ही महत्व है।

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    108 बार जप करें

    लोग अक्सर पूछते हैं

    दोनों रूप चलते हैं। ॐ के साथ छह अक्षर हो जाते हैं और इसे षडाक्षर कहते हैं। रोज़ के जप के लिए कोई भी रूप ठीक है।

    नहीं। शैव परंपराएँ पंचाक्षर को सबके लिए खुला मानती हैं। दीक्षा उन लोगों के लिए है जो इसे किसी गुरु के मार्गदर्शन में गहराई से करना चाहें।

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