अर्थ
सीधा अर्थ है, मैं शिव को नमन करता हूँ। ॐ हटा दें तो पाँच अक्षर बचते हैं: न, मः, शि, वा, य। इसी से इसे पंचाक्षर कहते हैं। शैव सिद्धांत में इन पाँच अक्षरों को पाँच तत्वों से भी जोड़ा गया है, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश।
परिचय
ये शब्द यजुर्वेद के श्री रुद्रम् से आते हैं, जहाँ पंक्ति है "नमः शिवाय च शिवतराय च"। समय के साथ यह छोटा-सा वाक्य अपने आप में मंत्र बन गया। तमिलनाडु में इसे "नमशिवाय" कहते हैं और तिरुमुरै के भजनों में यह बार-बार आता है। काशी के घाटों पर सुबह-शाम यही सुनाई देता है। इसके लिए किसी दीक्षा की शर्त नहीं, लोग बस शुरू कर देते हैं।
जप कैसे करें
शिवलिंग या शिव की तस्वीर के सामने बैठें, न हो तो कोई शांत कोना भी चलेगा। रुद्राक्ष की माला का चलन है। अक्षर जल्दी-जल्दी न बोलें, हर एक को पूरा उच्चारित करें। अगर जल या बेलपत्र चढ़ा रहे हैं, तो जप को उसी लय में चलने दें।
कब जपें: किसी भी समय। सोमवार, प्रदोष की शाम और महाशिवरात्रि की रात का अलग ही महत्व है।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।