अर्थ
हम उस दिव्य सविता देव के श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को प्रेरित करें। शुरुआत में जो "भूर्भुवः स्वः" है, वे तीन व्याहृतियाँ हैं, यानी पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग, तीनों लोकों का स्मरण।
परिचय
यह मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है, जिसके ऋषि विश्वामित्र माने जाते हैं। यह सविता को, यानी सूर्य के उस रूप को जो सबको गति देता है, संबोधित है। गायत्री इसके छंद का नाम है, जिसमें चौबीस अक्षर होते हैं। परंपरा में यह संध्या वंदन का केंद्र है, जो सुबह, दोपहर और शाम किया जाता है। इसमें कुछ माँगा नहीं जाता, न धन, न स्वास्थ्य। बस इतना कि बुद्धि सही दिशा में जाए।
जप कैसे करें
सुबह पूर्व की ओर, शाम को पश्चिम की ओर मुँह करके बैठें। धीरे बोलें और हर पद के बाद हल्का ठहराव रखें: तत्सवितुर्वरेण्यं, भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात्। उच्चारण के लिए किसी जानकार से एक बार ज़रूर सुनें।
कब जपें: सूर्योदय, दोपहर और सूर्यास्त, जो संध्या के तीन समय हैं।
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