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    सार्वभौमिक / भक्तिजयघोष

    जय जगन्नाथ

    Jai Jagannath

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    पुरी की रथयात्रा में लाखों लोगों की एक आवाज़।

    प्रकार
    जयघोष
    देवता
    सार्वभौमिक / भक्ति

    अर्थ

    जगन्नाथ की जय हो। जगन्नाथ का अर्थ है जगत के नाथ, यानी पूरे संसार के स्वामी।

    परिचय

    पुरी में जगन्नाथ जी अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। आषाढ़ में जब तीनों रथ पर निकलते हैं, तो बड़ दांड पर लाखों लोग रस्सियाँ खींचते हुए यही पुकारते हैं। कहते हैं रथयात्रा वह मौक़ा है जब भगवान ख़ुद मंदिर से बाहर आकर सबको दर्शन देते हैं, चाहे कोई भी हो।

    जप कैसे करें

    पूरी आवाज़ में, सबके साथ मिलकर।

    कब जपें: आषाढ़ की रथयात्रा, और कभी भी।

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    लोग अक्सर पूछते हैं

    एक कथा के अनुसार शिल्पी ने शर्त रखी थी कि काम पूरा होने तक कोई दरवाज़ा न खोले। रानी ने चिंता में दरवाज़ा पहले ही खोल दिया, और मूर्तियाँ उसी रूप में रह गईं। भक्त इसी रूप को पूर्ण मानते हैं।

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