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    सार्वभौमिक / भक्तिवैदिक मंत्र

    ॐ

    Om

    108 बार जप करें

    वह एक ध्वनि जिससे लगभग हर मंत्र शुरू होता है।

    प्रकार
    वैदिक मंत्र
    देवता
    सार्वभौमिक / भक्ति
    जप संख्या
    108 (एक माला)
    स्रोत
    माण्डूक्य उपनिषद्

    अर्थ

    ॐ को प्रणव कहते हैं। इसके तीन हिस्से हैं, अ, उ और म्। माण्डूक्य उपनिषद् इन्हें जागना, सपना देखना और गहरी नींद, इन तीन अवस्थाओं से जोड़ता है, और बोलने के बाद जो मौन बचता है, उसे चौथी अवस्था, तुरीय, कहता है।

    परिचय

    माण्डूक्य उपनिषद् में सिर्फ़ बारह मंत्र हैं, और पूरा उपनिषद् ॐ की ही व्याख्या है। वेद पाठ से पहले, पूजा के आरंभ में, योग कक्षा की शुरुआत में, हर जगह ॐ आता है। यह किसी एक देवता या संप्रदाय का नहीं है, और शायद इसीलिए इतनी दूर तक पहुँचा।

    जप कैसे करें

    सीधे बैठें, गहरी साँस लें, और छोड़ते हुए लंबा "ओ...म्" बोलें। अ, उ और म्, तीनों को अपनी जगह मिले, और म् पर होंठ बंद होने के बाद भी गूँज को चलने दें। फिर कुछ पल मौन में रुकें। वह मौन भी अभ्यास का हिस्सा है।

    कब जपें: ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा। ध्यान की शुरुआत और अंत में भी।

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    108 बार जप करें

    लोग अक्सर पूछते हैं

    तीन, अ, उ और म्। चौथा अंश वह मौन है जो बोलने के बाद रह जाता है।

    नहीं। "ओम" बोलचाल का लिखा रूप है, जबकि "अउम्" उसकी तीन ध्वनियों को अलग-अलग दिखाता है। उच्चारण एक ही है।

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