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    सार्वभौमिक / भक्तिवैदिक मंत्र

    ॐ तत् सत्

    Om Tat Sat

    108 बार जप करें

    तीन शब्द, जिन्हें गीता ब्रह्म का नाम कहती है।

    प्रकार
    वैदिक मंत्र
    देवता
    सार्वभौमिक / भक्ति
    जप संख्या
    108 (एक माला)
    स्रोत
    भगवद्गीता १७.२३

    अर्थ

    ॐ, वह, सत्य। "तत्" यानी वह परम तत्व जिसे सीधे शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता, और "सत्" यानी जो सच है और हमेशा रहता है।

    परिचय

    गीता के सत्रहवें अध्याय में कृष्ण बताते हैं कि ॐ तत् सत्, ये तीन शब्द ब्रह्म का निर्देश हैं। वे यह भी समझाते हैं कि यज्ञ, दान और तप शुरू करते समय ॐ बोला जाता है, फल की इच्छा छोड़कर कर्म करते समय तत्, और अच्छे काम को सत् कहा जाता है। इसीलिए कई लोग कोई काम पूरा करके, या चिट्ठी के अंत में भी, "ॐ तत् सत्" लिखकर उसे अर्पित कर देते हैं।

    जप कैसे करें

    किसी काम की शुरुआत या अंत में, या ध्यान में शांत मन से दोहराएँ।

    कब जपें: किसी भी शुभ काम के आरंभ या अंत में।

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    108 बार जप करें

    लोग अक्सर पूछते हैं

    सत्रहवें अध्याय, श्रद्धात्रय विभाग योग के तेईसवें श्लोक में। अगले चार श्लोक इन तीनों शब्दों का प्रयोग समझाते हैं।

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