अर्थ
ॐ, वह, सत्य। "तत्" यानी वह परम तत्व जिसे सीधे शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता, और "सत्" यानी जो सच है और हमेशा रहता है।
परिचय
गीता के सत्रहवें अध्याय में कृष्ण बताते हैं कि ॐ तत् सत्, ये तीन शब्द ब्रह्म का निर्देश हैं। वे यह भी समझाते हैं कि यज्ञ, दान और तप शुरू करते समय ॐ बोला जाता है, फल की इच्छा छोड़कर कर्म करते समय तत्, और अच्छे काम को सत् कहा जाता है। इसीलिए कई लोग कोई काम पूरा करके, या चिट्ठी के अंत में भी, "ॐ तत् सत्" लिखकर उसे अर्पित कर देते हैं।
जप कैसे करें
किसी काम की शुरुआत या अंत में, या ध्यान में शांत मन से दोहराएँ।
कब जपें: किसी भी शुभ काम के आरंभ या अंत में।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।