अर्थ
हरि यानी विष्णु, वह जो दुख हर लेता है, और ॐ यानी प्रणव। एक तरफ़ रूप वाला भगवान, दूसरी तरफ़ रूप से परे। यह छोटा-सा वाक्य दोनों को साथ रखता है।
परिचय
ऋषिकेश और हरिद्वार के आश्रमों में साधु और यात्री एक-दूसरे को "हरि ॐ" कहकर ही मिलते हैं। स्वामी शिवानंद जैसे संतों ने इसे बहुत प्रचलित किया। यह इतना छोटा है कि दिन भर मन में चलता रह सकता है।
जप कैसे करें
साँस के साथ, "हरि" भीतर लेते हुए और "ॐ" बाहर छोड़ते हुए। माला हो या न हो।
कब जपें: किसी भी समय।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।