अर्थ
संस्कृत में "गो" के कई अर्थ हैं, गाय भी, इंद्रियाँ भी और पृथ्वी भी। गोविन्द वह है जो इन सबका पालन करे। भागवत में कथा है कि कृष्ण ने जब गोवर्धन उठाकर गोकुल को बचाया, तब इंद्र और कामधेनु सुरभि ने उनका अभिषेक करके उन्हें यही नाम दिया।
परिचय
तिरुपति जाने वाले यात्री सात पहाड़ियाँ चढ़ते हुए "गोविंदा गोविंदा" पुकारते हैं, और बहुत से लोग पूरी चढ़ाई में इसके सिवा कुछ नहीं बोलते। गौड़ीय वैष्णवों के कीर्तन "गोविन्द जय जय, गोपाल जय जय" में भी यही नाम है। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट के दिन इसकी रौनक़ अलग होती है।
जप कैसे करें
"गोविंदा गोविंदा" की लय अपने आप बन जाती है, बस उसे पकड़ लें। अकेले हों तो माला पर, लोगों के साथ हों तो खुलकर पुकारें।
कब जपें: सुबह, एकादशी और गोवर्धन पूजा।
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