अर्थ
बस राधा का नाम, दो बार। इसमें और कुछ नहीं जोड़ा जाता।
परिचय
मथुरा-वृंदावन में लोग मिलते ही "राधे राधे" कहते हैं, और विदा लेते समय भी। दुकान पर, गली में, फ़ोन उठाते हुए। इसी तरह नाम-जप अलग से बैठकर करने की चीज़ न रहकर दिन भर की बोलचाल में घुल जाता है। राधाष्टमी पर यह नाम सबसे ऊँचा बरसाना में गूँजता है, जो राधा रानी का अपना गाँव है।
जप कैसे करें
मन में या होंठों पर, जब भी याद आए। चाहें तो इसे साँस से जोड़ लें, एक "राधे" साँस भीतर लेते हुए और एक बाहर छोड़ते हुए।
कब जपें: पूरे दिन। राधाष्टमी इसका अपना दिन है।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।