अर्थ
राधा और कृष्ण, दोनों का नाम एक साथ। वैष्णव भक्ति में राधा को कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति माना गया है, यानी वह शक्ति जिससे स्वयं कृष्ण को आनंद मिलता है। इसलिए दोनों को अलग करके कम ही देखा जाता है।
परिचय
वृंदावन, बरसाना या गोवर्धन जाइए, यह नाम हर तरफ़ सुनाई देगा। रिक्शे वाले से लेकर मंदिर के पुजारी तक, सब यही बोलते हैं। कई भक्त मानते हैं कि कृष्ण तब सबसे प्रसन्न होते हैं जब राधा का नाम पहले लिया जाए। निंबार्क, वल्लभ और राधावल्लभ, ब्रज के लगभग हर संप्रदाय में यह नाम प्रिय है।
जप कैसे करें
इसके लिए किसी आसन की ज़रूरत नहीं। बैठकर माला पर जप सकते हैं, या परिक्रमा करते हुए धीमे स्वर में गा सकते हैं। ब्रज में इसे गाकर जपने का चलन ज़्यादा है। कोई सरल धुन पकड़ लें तो मन जल्दी टिकता है।
कब जपें: किसी भी समय। ब्रज में शाम की आरती के आसपास का समय ख़ास माना जाता है।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।