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    हरे कृष्ण महामंत्र

    हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे

    108 बार जप करें

    सोलह नामों का वह मंत्र जिसे चैतन्य महाप्रभु ने गली-गली गाया।

    प्रकार
    नाम जप
    देवता
    भगवान कृष्ण
    जप संख्या
    108 (एक माला)
    स्रोत
    कलिसंतरण उपनिषद्

    अर्थ

    इसमें भगवान के तीन ही नाम हैं: हरे, कृष्ण और राम। हरे को राधा रानी का संबोधन माना जाता है, यानी भगवान की अपनी शक्ति। पूरा भाव कुछ ऐसा है, हे राधे, हे कृष्ण, हे राम, मुझे अपनी सेवा में ले लो। कुल सोलह शब्द हैं, इसलिए इसे षोडश नाम भी कहते हैं।

    परिचय

    यह मंत्र कलिसंतरण उपनिषद् में मिलता है, जहाँ ब्रह्मा जी नारद को बताते हैं कि कलियुग के दोष इसी से कटते हैं। उपनिषद् में इसका क्रम "हरे राम" से शुरू होता है। सोलहवीं सदी में चैतन्य महाप्रभु ने इसे बंगाल और ओडिशा में कीर्तन बनाकर घर-घर पहुँचाया, और आज जो क्रम ज़्यादातर लोग जानते हैं, वह उन्हीं की परंपरा से आया है। पिछली सदी में इस्कॉन इसे दुनिया भर में ले गया। लोगों को इसकी सबसे अच्छी बात यही लगती है कि यह कुछ माँगता नहीं, न दीक्षा, न विधि, न कोई ख़ास समय।

    जप कैसे करें

    तुलसी की माला हो तो अच्छा है। सुमेरु के बगल वाले मनके से शुरू करें, हर मनके पर पूरा मंत्र एक बार बोलें और अंगूठे व बीच की उँगली से मनका आगे सरकाएँ। 108 पूरे होने पर सुमेरु को पार न करें, माला पलटकर वापस चलें। शब्द इतने साफ़ बोलें कि ख़ुद सुन सकें। सुनना ही इस अभ्यास का बड़ा हिस्सा है।

    कब जपें: सुबह ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा है, पर इस मंत्र पर समय या जगह की कोई पाबंदी नहीं।

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    108 बार जप करें

    लोग अक्सर पूछते हैं

    दीक्षित भक्त रोज़ सोलह माला का संकल्प लेते हैं, यानी लगभग 1728 बार। नए लोगों को एक-दो माला से शुरू करने को कहा जाता है।

    हाँ। चैतन्य परंपरा में इस पर कोई रोक नहीं है। माला बस गिनती में मदद करती है।

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