अर्थ
नारायण का नाम, दोहराया हुआ। इसमें और कुछ नहीं।
परिचय
पुराणों और टीवी की कथाओं, दोनों में नारद मुनि "नारायण नारायण" कहते हुए ही आते हैं। इसी से यह नाम इतना जाना-पहचाना हो गया। पर इसके पीछे की बात गहरी है। नारद का हर काम, हर यात्रा, इसी नाम के साथ होती है। नाम उनके लिए अलग से करने वाला जप नहीं, साँस जैसा है।
जप कैसे करें
कोई विधि नहीं। चलते, काम करते, इंतज़ार करते हुए, मन में दोहराते रहें।
कब जपें: हर समय।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।