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    भगवान विष्णुनमस्कार मंत्र

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

    Om Namo Bhagavate Vasudevaya

    108 बार जप करें

    भागवत का मंगलाचरण, और ध्रुव का मंत्र।

    प्रकार
    नमस्कार मंत्र
    देवता
    भगवान विष्णु
    जप संख्या
    108 (एक माला)
    स्रोत
    श्रीमद्भागवत ४.८.५४

    अर्थ

    मैं भगवान वासुदेव को नमन करता हूँ। वासुदेव यानी वसुदेव के पुत्र कृष्ण, और साथ ही वह जो हर जगह बसा हुआ है। इसमें बारह अक्षर हैं, इसलिए इसे द्वादशाक्षर मंत्र कहते हैं।

    परिचय

    भागवत की ज़्यादातर प्रतियाँ पहले श्लोक से पहले मंगलाचरण के रूप में इन्हीं शब्दों से शुरू होती हैं। चौथे स्कंध में कथा है कि पाँच साल का ध्रुव जब सौतेली माँ के अपमान से दुखी होकर वन की ओर चला, तो नारद ने उसे यही मंत्र दिया। ध्रुव ने इसी के सहारे तप किया। इसलिए यह मंत्र ख़ास तौर पर बच्चों को सिखाने की परंपरा भी है।

    जप कैसे करें

    तुलसी की माला पर। भागवत परंपरा में इसे उपांशु जपने की सलाह दी जाती है, यानी होंठ हिलें पर आवाज़ बाहर न जाए।

    कब जपें: सुबह, एकादशी और भागवत सप्ताह के दौरान।

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    108 बार जप करें

    लोग अक्सर पूछते हैं

    नारद ने वन जाते ध्रुव को यही द्वादशाक्षर मंत्र दिया था। उसी के जप से ध्रुव को भगवान के दर्शन हुए और वह ध्रुव तारे के रूप में अमर हुआ।

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