प्रसिद्ध मंदिर
नीलकंठ महादेव मंदिर
पौड़ी गढ़वाल (ऋषिकेश के निकट), उत्तराखंड
जहाँ परंपरा के अनुसार शिव ने समुद्र मंथन का विष धारण किया
एक नज़र में
- स्थान
- पौड़ी गढ़वाल (ऋषिकेश के निकट), उत्तराखंड
- आराध्य
- भगवान शिव (नीलकंठ रूप में)
- श्रेणी
- प्रसिद्ध मंदिर
- परंपरा
- शैव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (लगभग 32 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (लगभग 45 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- सितंबर से मार्च। श्रावण (जुलाई-अगस्त) में दर्शन तो होते हैं पर भीड़ अत्यधिक होती है।
इतिहास
नीलकंठ महादेव मंदिर पौड़ी गढ़वाल ज़िले में, ऋषिकेश से लगभग 32 किमी दूर घने वन के बीच स्थित है। मंदिर की स्थापत्य शैली पर द्रविड़ प्रभाव दिखाई देता है, जो इस क्षेत्र में असामान्य है। यह नर-नारायण पर्वत श्रेणियों से घिरा है।
धार्मिक महत्व
कथा के अनुसार समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने यहीं कंठ में धारण किया था, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। श्रावण मास में, विशेषकर काँवड़ यात्रा के समय, यहाँ लाखों श्रद्धालु जल चढ़ाने आते हैं और मार्ग पर असाधारण भीड़ रहती है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
मंदिर प्रातः से सायं तक खुला रहता है। श्रावण और शिवरात्रि में समय व व्यवस्था बदल जाती है।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
ऋषिकेश से टैक्सी और साझा वाहन चलते हैं; मार्ग पहाड़ी और घुमावदार है। कुछ श्रद्धालु राम झूला से होते हुए वन मार्ग से पैदल भी जाते हैं।
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