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    प्रसिद्ध मंदिर

    श्री दण्डायुधपाणि स्वामी मंदिर, पलनी

    पलनी, डिंडीगुल ज़िला, तमिलनाडु

    मुरुगन के छह पड़ाव स्थलों में से एक, पहाड़ी पर विराजमान तपस्वी स्वरूप

    एक नज़र में

    स्थान
    पलनी, डिंडीगुल ज़िला, तमिलनाडु
    आराध्य
    भगवान मुरुगन (दण्डायुधपाणि रूप में)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    शैव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    पलनी रेलवे स्टेशन (लगभग 2-3 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    कोयंबटूर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 110 किमी); मदुरै (लगभग 120 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च। थाईपूसम (जनवरी-फरवरी) पर लाखों श्रद्धालु पैदल आते हैं और भीड़ असाधारण होती है।

    इतिहास

    मंदिर पलनी पहाड़ियों के बीच एक पहाड़ी के शिखर पर है और इसका प्रबंधन तमिलनाडु सरकार का हिंदू धार्मिक एवं धर्मस्व विभाग करता है। संगम कालीन ग्रंथ "तिरुमुरुगात्रुप्पडै" में इस स्थान का उल्लेख तिरुआविननकुडि के रूप में मिलता है। यह मुरुगन के "अरुपडै वीडु" — छह पड़ाव स्थलों — में गिना जाता है।

    धार्मिक महत्व

    कथा के अनुसार नारद द्वारा लाए गए ज्ञान-फल को लेकर हुए प्रसंग में रुष्ट होकर मुरुगन कैलास छोड़कर यहाँ आ गए और तपस्वी रूप धारण किया — इसी से "पळनी" नाम की व्युत्पत्ति जोड़ी जाती है। मूर्ति को नवपाषाण नामक विशिष्ट मिश्रण से बना माना जाता है। यहाँ मुंडन, काँवड़ और पंचामृत प्रसाद की परंपरा विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    मंदिर प्रातः से रात्रि तक खुला रहता है और दिन भर में कई पूजाएँ होती हैं। थाईपूसम और पंगुनी उत्तिरम पर समय बदल जाता है।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    पलनी कोयंबटूर, मदुरै और डिंडीगुल से बस व रेल द्वारा जुड़ा है। पहाड़ी पर चढ़ने के लिए सीढ़ियाँ, रोपवे और विंच रेलवे तीनों उपलब्ध हैं।

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    सामान्य प्रश्न

    केला, गुड़, घी, शहद और इलायची से बना यहाँ का प्रसिद्ध प्रसाद, जिसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त है।

    नहीं। सीढ़ियों के अलावा रोपवे और विंच रेलवे की सुविधा है।