प्रसिद्ध मंदिर
वडक्कुन्नाथन मंदिर, त्रिशूर
त्रिशूर, केरल
केरल शैली की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण, त्रिशूर पूरम का केंद्र
एक नज़र में
- स्थान
- त्रिशूर, केरल
- आराध्य
- भगवान शिव (वडक्कुन्नाथन रूप में)
- श्रेणी
- प्रसिद्ध मंदिर
- परंपरा
- शैव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- त्रिशूर रेलवे स्टेशन (लगभग 2 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नेदुम्बास्सेरी (लगभग 55 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से मार्च। त्रिशूर पूरम अप्रैल-मई में होता है और तब नगर में असाधारण भीड़ रहती है।
इतिहास
वडक्कुन्नाथन त्रिशूर नगर के मध्य एक टीले पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर है और केरल की पारंपरिक स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। चारों दिशाओं में एक-एक विशाल गोपुर और एक कूत्तंबलम इसकी विशेषता हैं। भीतर महाभारत के प्रसंगों को दर्शाने वाले भित्ति चित्र हैं। मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है।
धार्मिक महत्व
परंपरा में इस मंदिर की स्थापना परशुराम से जोड़ी जाती है। त्रिशूर पूरम — केरल का सबसे प्रसिद्ध मंदिर उत्सव — इसी मंदिर के मैदान में होता है, जिसमें सुसज्जित हाथियों की पंक्ति, पंचवाद्यम और छत्र-विनिमय मुख्य आकर्षण हैं। ध्यान रहे कि पूरम का आयोजन मंदिर परिसर के बाहरी मैदान में होता है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
प्रातः और सायं के निश्चित समयों में दर्शन होते हैं, दोपहर में मंदिर बंद रहता है। पूरम के दिनों में व्यवस्था पूरी तरह बदल जाती है।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
त्रिशूर रेल और सड़क दोनों से भली-भाँति जुड़ा है और मंदिर नगर के केंद्र में है। केरल के कई मंदिरों की तरह यहाँ भी पुरुषों के लिए प्रवेश हेतु वस्त्र संबंधी परंपरा है — ऊपरी वस्त्र उतारना और मुंडु पहनना।
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