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    प्रसिद्ध मंदिर

    विरूपाक्ष मंदिर, हम्पी

    हम्पी, विजयनगर ज़िला, कर्नाटक

    हम्पी के खंडहरों के बीच आज भी निरंतर पूजित शिव मंदिर

    एक नज़र में

    स्थान
    हम्पी, विजयनगर ज़िला, कर्नाटक
    आराध्य
    भगवान शिव (विरूपाक्ष रूप में)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    शैव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    होसपेट जंक्शन (लगभग 13 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    जिंदल विजयनगर हवाई अड्डा, तोरणगल्लु (लगभग 40 किमी); हुबली (लगभग 160 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से फरवरी। गर्मियों में हम्पी में तापमान बहुत अधिक हो जाता है और खुले खंडहरों में घूमना कठिन होता है।

    इतिहास

    विरूपाक्ष मंदिर का मूल भाग 7वीं शताब्दी का माना जाता है। विजयनगर साम्राज्य के काल में देवराय द्वितीय के अधीन सामंत लक्कण दंडेश ने इसका बड़ा विस्तार करवाया। हम्पी के स्मारक समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, और 1565 में विजयनगर के पतन के बाद भी इस मंदिर में पूजा कभी बंद नहीं हुई।

    धार्मिक महत्व

    यह तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है और हम्पी का मुख्य तीर्थ केंद्र है। मंदिर की एक प्रसिद्ध विशेषता यह है कि मुख्य गोपुर की छाया एक छोटे कक्ष में पिनहोल की भाँति उलटी पड़ती है। परंपरा में विरूपाक्ष को देवी पम्पा का पति माना जाता है, और यहाँ प्रतिवर्ष उनका विवाहोत्सव मनाया जाता है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    मंदिर प्रातः से रात्रि तक खुला रहता है, दोपहर में कुछ घंटे पट बंद रहते हैं। सटीक समय के लिए स्थानीय सूचना देख लें।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    होसपेट से हम्पी के लिए बस और ऑटो नियमित चलते हैं। हम्पी के भीतर अधिकांश स्मारक पैदल या साइकिल से देखे जाते हैं; खंडहर बहुत फैले हुए हैं, इसलिए कम से कम एक पूरा दिन रखें।

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    सामान्य प्रश्न

    हम्पी के अधिकांश स्मारक अब पुरातात्विक स्थल हैं, जबकि विरूपाक्ष मंदिर में पूजा निरंतर चलती रही है और आज भी होती है।

    खंडहर कई किलोमीटर में फैले हैं। मुख्य स्थल देखने के लिए भी कम से कम एक पूरा दिन चाहिए, और विस्तार से देखने के लिए दो दिन।