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    प्रसिद्ध मंदिर

    अट्टुकाल भगवती मंदिर

    तिरुवनंतपुरम, केरल

    अट्टुकाल पोंगाल के लिए प्रसिद्ध देवी मंदिर, जहाँ लाखों स्त्रियाँ एक साथ प्रसाद पकाती हैं

    एक नज़र में

    स्थान
    तिरुवनंतपुरम, केरल
    आराध्य
    देवी भगवती (अट्टुकाल अम्मा)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    शाक्त
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    तिरुवनंतपुरम सेंट्रल (लगभग 2 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 6 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च। पोंगाल देखना हो तो फरवरी-मार्च, पर तब नगर में अत्यधिक भीड़ होती है।

    इतिहास

    अट्टुकाल भगवती मंदिर तिरुवनंतपुरम नगर में किलि नदी के किनारे स्थित है। यहाँ देवी को अट्टुकाल अम्मा कहा जाता है और परंपरा में उन्हें तमिल महाकाव्य "शिलप्पदिकारम्" की नायिका कण्णगी से जोड़ा जाता है, जिन्हें देवी का स्वरूप माना जाता है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप आधुनिक जीर्णोद्धारों का परिणाम है।

    धार्मिक महत्व

    मंदिर की सबसे बड़ी पहचान अट्टुकाल पोंगाल है, जो फरवरी-मार्च में होता है। इसमें स्त्रियाँ मंदिर के आसपास की सड़कों पर मिट्टी के बर्तनों में गुड़, चावल और नारियल का पायसम बनाकर देवी को अर्पित करती हैं। 2009 में इस आयोजन को धार्मिक गतिविधि हेतु स्त्रियों के सबसे बड़े एकत्रीकरण के रूप में गिनीज विश्व कीर्तिमान में दर्ज किया गया था।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः और सायं के निश्चित समयों में दर्शन; दोपहर में पट बंद रहते हैं। पोंगाल के दिनों में व्यवस्था पूरी तरह अलग होती है।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    मंदिर नगर के भीतर है और रेलवे स्टेशन तथा हवाई अड्डे दोनों से कुछ ही किलोमीटर दूर है। पोंगाल के दिनों में आसपास का पूरा क्षेत्र यातायात के लिए बंद कर दिया जाता है।

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    सामान्य प्रश्न

    यह मुख्यतः स्त्रियों का अनुष्ठान है, जिसमें वे सड़कों पर चूल्हा रखकर देवी के लिए पायसम बनाती हैं।

    पोंगाल में स्त्रियों की असाधारण संख्या के कारण यह लोकप्रिय उपमा प्रचलित हुई है; यह कोई शास्त्रीय वर्गीकरण नहीं है।