प्रसिद्ध मंदिर
गंगोत्री धाम
उत्तरकाशी ज़िला, उत्तराखंड
भागीरथी के तट पर छोटा चार धाम का वह पड़ाव जहाँ गंगा की पूजा होती है
एक नज़र में
- स्थान
- उत्तरकाशी ज़िला, उत्तराखंड
- आराध्य
- माँ गंगा
- श्रेणी
- प्रसिद्ध मंदिर
- परंपरा
- अन्य परंपरा
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (लगभग 250 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (लगभग 270 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- मई-जून और सितंबर-अक्टूबर। जुलाई-अगस्त में मानसून के कारण भूस्खलन और मार्ग बंद होना आम है।
इतिहास
गंगोत्री उत्तरकाशी ज़िले में भागीरथी नदी के तट पर लगभग 3,100 मीटर की ऊँचाई पर बसा तीर्थ है। वर्तमान मंदिर 18वीं शताब्दी में गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा द्वारा बनवाया गया माना जाता है, और बाद में जयपुर राजघराने ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। नदी का वास्तविक उद्गम गोमुख है, जो गंगोत्री से लगभग 18 किमी ऊपर गंगोत्री हिमनद पर है।
धार्मिक महत्व
कथा के अनुसार राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा पृथ्वी पर उतरीं, और शिव ने उनका वेग अपनी जटाओं में धारण किया — इसी कारण नदी को यहाँ भागीरथी कहा जाता है। गंगोत्री उत्तराखंड के छोटा चार धाम — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — का दूसरा पड़ाव है, और परंपरा में यात्रा इसी क्रम में की जाती है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
मंदिर वर्ष भर खुला नहीं रहता। कपाट अक्षय तृतीया के आसपास (अप्रैल-मई) खुलते हैं और दीपावली के बाद भैया दूज के आसपास (अक्टूबर-नवंबर) बंद हो जाते हैं; शीतकाल में देवी की पूजा मुखबा गाँव में होती है।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
सड़क मार्ग गंगोत्री तक जाता है, इसलिए केदारनाथ या यमुनोत्री की तरह पैदल चढ़ाई नहीं करनी पड़ती। ऋषिकेश या देहरादून से उत्तरकाशी होते हुए बस और टैक्सी चलती हैं। पहाड़ी मार्ग लंबा है, इसलिए अधिकांश यात्री उत्तरकाशी या हर्षिल में एक रात रुकते हैं।