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    प्रसिद्ध मंदिर

    यमुनोत्री धाम

    उत्तरकाशी ज़िला, उत्तराखंड

    छोटा चार धाम का पहला पड़ाव — गर्म कुंड और यमुना का उद्गम

    एक नज़र में

    स्थान
    उत्तरकाशी ज़िला, उत्तराखंड
    आराध्य
    माँ यमुना
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    अन्य परंपरा
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (लगभग 200 किमी, जानकी चट्टी तक)
    निकटतम हवाई अड्डा
    जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (लगभग 210 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    मई-जून और सितंबर-अक्टूबर। मानसून में चढ़ाई फिसलन भरी और जोखिम भरी हो जाती है।

    इतिहास

    यमुनोत्री गढ़वाल हिमालय में बंदरपूँछ पर्वत की ढलान पर लगभग 3,293 मीटर की ऊँचाई पर है और यमुना नदी का उद्गम क्षेत्र माना जाता है। यह छोटा चार धाम का सबसे पश्चिमी धाम है। मंदिर कई बार हिमपात और भूस्खलन में क्षतिग्रस्त हुआ और पुनर्निर्मित किया गया है।

    धार्मिक महत्व

    परंपरा में यमुना को सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। यहाँ की सबसे विशिष्ट बात सूर्य कुंड है — उबलते हुए गर्म जल का स्रोत, जिसमें श्रद्धालु कपड़े में चावल और आलू बाँधकर पकाते हैं और उसे प्रसाद के रूप में लेते हैं।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    कपाट अक्षय तृतीया के आसपास (अप्रैल-मई) खुलते हैं और भैया दूज के आसपास (अक्टूबर-नवंबर) बंद होते हैं; शीतकाल में पूजा खरसाली गाँव में होती है।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    सड़क जानकी चट्टी तक जाती है; वहाँ से मंदिर तक लगभग 5-6 किमी की चढ़ाई पैदल, घोड़े या पालकी से तय की जाती है। देहरादून और ऋषिकेश से बरकोट होते हुए बसें और टैक्सियाँ मिलती हैं।

    सामान्य प्रश्न

    जानकी चट्टी से लगभग 5-6 किमी। घोड़े और पालकी उपलब्ध रहते हैं।

    मंदिर के पास का गर्म जलस्रोत, जिसका पानी इतना गर्म होता है कि श्रद्धालु उसमें चावल और आलू पकाकर प्रसाद बना लेते हैं।