शक्तिपीठ
विमला शक्तिपीठ
जगन्नाथ मंदिर परिसर, पुरी, ओडिशा
चार आदि शक्तिपीठों में से एक — जगन्नाथ जी का भोग इन्हें अर्पित होने के बाद ही महाप्रसाद बनता है
एक नज़र में
- स्थान
- जगन्नाथ मंदिर परिसर, पुरी, ओडिशा
- आराध्य
- देवी विमला (भैरव: जगन्नाथेश्वर)
- श्रेणी
- शक्तिपीठ
- परंपरा
- शाक्त
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- पुरी रेलवे स्टेशन (लगभग 2-3 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर (लगभग 60 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से फरवरी। रथ यात्रा (जून-जुलाई) और दुर्गा पूजा के समय भीड़ बहुत अधिक रहती है।
इतिहास
विमला मंदिर जगन्नाथ मंदिर परिसर के भीतर, आंतरिक प्राकार के दक्षिण-पश्चिम कोने में रोहिणी कुंड के पास स्थित है। मुख्य विग्रह छठी शताब्दी का माना जाता है, जबकि वर्तमान संरचना नौवीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के काल की मानी जाती है — संभवतः किसी पुराने मंदिर के अवशेषों पर। *मादला पांजी* इसका श्रेय सोमवंशी शासक ययाति केशरी को देती है, इसलिए निर्माण-काल पर मतभेद बना हुआ है। परंपरागत सूचियों में यहाँ सती का पैर गिरा बताया जाता है, हालाँकि *पीठनिर्णय* की एक व्याख्या इसे नाभि या "उच्छिष्ट" से जोड़ती है और पूर्ण पीठ के बजाय उप-पीठ मानती है।
धार्मिक महत्व
पुरी की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा इसी मंदिर से होकर गुज़रती है: जगन्नाथ जी को अर्पित भोजन तब तक महाप्रसाद नहीं माना जाता जब तक वह विमला देवी को भी अर्पित न कर दिया जाए। यानी जो लाखों श्रद्धालु पुरी का महाप्रसाद ग्रहण करते हैं, वे अनजाने में एक शक्तिपीठ के प्रसाद का ही हिस्सा बनते हैं। दुर्गा पूजा के सोलह दिनों में यहाँ विशेष पूजा होती है, जिसके कुछ अनुष्ठान आज भी ब्रह्म मुहूर्त से पहले, गोपनीयता के साथ किए जाते हैं।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
जगन्नाथ मंदिर के दर्शन समय के अनुसार, सामान्यतः प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक (बीच में अनुष्ठानों हेतु विराम)। ध्यान रखें कि जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
पुरी रेलवे स्टेशन कोलकाता, दिल्ली और भुवनेश्वर से सीधी ट्रेनों से जुड़ा है। स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर तक रिक्शा व ऑटो आसानी से मिलते हैं। विमला मंदिर अलग से नहीं, बल्कि जगन्नाथ मंदिर परिसर के भीतर ही दर्शन किया जाता है — मुख्य दर्शन के बाद परिसर में ही दक्षिण-पश्चिम की ओर।
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