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    शक्तिपीठ

    बज्रेश्वरी देवी शक्तिपीठ

    कांगड़ा (नगरकोट), कांगड़ा ज़िला, हिमाचल प्रदेश

    वह मंदिर जो बार-बार लूटा गया, भूकंप में ढहा, और हर बार फिर खड़ा हुआ

    एक नज़र में

    स्थान
    कांगड़ा (नगरकोट), कांगड़ा ज़िला, हिमाचल प्रदेश
    आराध्य
    देवी बज्रेश्वरी / ब्रजेश्वरी (भैरव: अभिरुनाथेश्वर)
    श्रेणी
    शक्तिपीठ
    परंपरा
    शाक्त
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    कांगड़ा मंदिर रेलवे स्टेशन (नैरो गेज, कांगड़ा वैली रेलवे, लगभग 2-3 किमी); ब्रॉड गेज हेतु पठानकोट (लगभग 90 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    कांगड़ा (गग्गल) हवाई अड्डा (लगभग 12-15 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    मार्च से जून और सितंबर से नवंबर। नवरात्रि (चैत्र व शारदीय) में दर्शन का विशेष महत्व है, किंतु भीड़ अधिक रहती है।

    इतिहास

    परंपरा के अनुसार यहाँ सती का बायाँ वक्ष गिरा था। मंदिर नगरकोट (कांगड़ा) में लगभग 738 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, और लोक-कथा इसका निर्माण पांडवों से जोड़ती है, जिन्हें स्वप्न में देवी ने नगरकोट में मंदिर बनाने का निर्देश दिया था। इस मंदिर का इतिहास इसकी संपत्ति से जुड़ा हुआ है। टनों सोना और चाँदी के घंटों से समृद्ध होने के कारण यह आक्रमणकारियों का निशाना बना — महमूद ग़ज़नवी ने इसे कई बार (अभिलेखों के अनुसार कम-से-कम पाँच बार) लूटा। 1905 के भीषण कांगड़ा भूकंप में पूरा परिसर मलबे में बदल गया, और 1920 में इसे फिर से बनाया गया। आज जो मंदिर खड़ा है, वही पुनर्निर्मित रूप है।

    धार्मिक महत्व

    कांगड़ा घाटी के तीन प्रमुख शक्तिपीठों — बज्रेश्वरी, ज्वालामुखी और चामुंडा — में यह सबसे पुराना और ऐतिहासिक रूप से सबसे समृद्ध माना जाता है। नवरात्रि यहाँ का मुख्य पर्व है, और मकर संक्रांति के आसपास मनाया जाने वाला स्थानीय उत्सव भी इस मंदिर की परंपरा का हिस्सा है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    सामान्यतः प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 8:00-9:00 बजे तक; नवरात्रि में समय बढ़ाया जाता है।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    दिल्ली और चंडीगढ़ से पठानकोट तक ट्रेन, और वहाँ से बस या टैक्सी से कांगड़ा। कांगड़ा वैली की नैरो गेज ट्रेन धीमी है पर रास्ता सुंदर है। धर्मशाला (लगभग 18 किमी) से टैक्सी सबसे सुविधाजनक विकल्प है।

    माँ दुर्गा की भक्ति आगे बढ़ाएँ

    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    अभिलेखों के अनुसार महमूद ग़ज़नवी ने इसे कई बार लूटा, और 1905 के कांगड़ा भूकंप में यह पूरी तरह ढह गया। वर्तमान मंदिर 1920 में पुनर्निर्मित है।

    ज्वालामुखी (ज्वालाजी) और चामुंडा देवी — इन्हें बज्रेश्वरी के साथ एक ही यात्रा में जोड़कर दर्शन किया जाता है।