शक्तिपीठ
दंतेश्वरी शक्तिपीठ
दंतेवाड़ा, बस्तर अंचल, छत्तीसगढ़
बस्तर की कुलदेवी — जिनके नाम पर पूरा नगर बसा है
एक नज़र में
- स्थान
- दंतेवाड़ा, बस्तर अंचल, छत्तीसगढ़
- आराध्य
- देवी दंतेश्वरी (भैरव: कपाल भैरव)
- श्रेणी
- शक्तिपीठ
- परंपरा
- शाक्त
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- दंतेवाड़ा रेलवे स्टेशन (किरंदुल-विशाखापत्तनम लाइन पर); बड़ा रेलहेड जगदलपुर (लगभग 80 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- जगदलपुर हवाई अड्डा (लगभग 85 किमी, सीमित उड़ानें); स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर (लगभग 370 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से फरवरी। बस्तर दशहरा (सितंबर-अक्टूबर) और नवरात्रि में यहाँ का माहौल सबसे जीवंत होता है।
इतिहास
परंपरा के अनुसार यहाँ सती का **दाँत** गिरा था, और इसी से स्थान का नाम दंतेवाड़ा पड़ा। वर्तमान मंदिर चौदहवीं शताब्दी का माना जाता है, और देवी पहले **काकतीय शासकों** की आराध्य थीं। आगे चलकर वे बस्तर राजवंश की **कुलदेवी** बनीं, और आज भी बस्तर की राजपरंपरा से उनका सीधा संबंध है। मंदिर की संरचना चार भागों में विभाजित है — गर्भगृह, महामंडप, मुख्य मंडप और सभा मंडप। प्रवेश पर एक गरुड़-स्तंभ स्थापित है, और गर्भगृह में देवी की काले पत्थर की प्रतिमा है।
धार्मिक महत्व
दंतेश्वरी देवी छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल की सबसे बड़ी देवी-परंपरा का केंद्र हैं। **बस्तर दशहरा** यहाँ का सबसे बड़ा आयोजन है — यह देश के सबसे लंबे चलने वाले दशहरा उत्सवों में गिना जाता है, और इसमें आसपास के गाँवों तथा वनांचल से हज़ारों आदिवासी श्रद्धालु देवी के दर्शन हेतु एकत्र होते हैं। उत्सव के दौरान देवी की प्रतिमा भव्य शोभायात्रा में नगर-भ्रमण करती है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
सामान्यतः प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक (मध्याह्न में विराम संभव)।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
दंतेवाड़ा जगदलपुर से लगभग 80 किमी दूर है, और दोनों के बीच बस व टैक्सी नियमित चलती हैं। रायपुर से जगदलपुर तक बस या उड़ान, और आगे सड़क मार्ग सबसे सामान्य रास्ता है। किरंदुल-विशाखापत्तनम रेल मार्ग से आने पर दंतेवाड़ा स्टेशन निकटतम है।
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