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    शक्तिपीठ

    सप्तश्रृंगी शक्तिपीठ

    वणी (नंदुरी), कलवण तालुका, नासिक ज़िला, महाराष्ट्र

    सात चोटियों की देवी — चट्टान में तराशी अठारह भुजाओं वाली आठ फुट ऊँची प्रतिमा

    एक नज़र में

    स्थान
    वणी (नंदुरी), कलवण तालुका, नासिक ज़िला, महाराष्ट्र
    आराध्य
    देवी सप्तश्रृंगी / भद्रकाली (भैरव: विकृताक्षेश्वर)
    श्रेणी
    शक्तिपीठ
    परंपरा
    शाक्त
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    नासिक रोड रेलवे स्टेशन (लगभग 65-70 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    नासिक (ओझर) हवाई अड्डा (लगभग 60 किमी, सीमित उड़ानें); छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई (लगभग 230 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से फरवरी। चैत्रोत्सव और नवरात्रि में वातावरण अद्भुत होता है, पर भीड़ बहुत अधिक रहती है। मानसून में पहाड़ी सुंदर लगती है किंतु रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं।

    इतिहास

    "सप्तश्रृंगी" नाम सात पर्वत-शिखरों से आया है, जिनके बीच यह मंदिर बसा है। देवी की प्रतिमा किसी अलग पत्थर की मूर्ति नहीं है — यह एक खड़ी चट्टान की गुफा में, चट्टान में ही तराशी गई लगभग आठ फुट ऊँची, **अठारह भुजाओं वाली** (अष्ट-दश भुजा) आकृति है, जिस पर सिंदूर की मोटी परत चढ़ी होने से वह केसरिया दिखती है। महाराष्ट्र की "साढ़े तीन शक्तिपीठ" परंपरा में सप्तश्रृंगी को "आधा" पीठ माना जाता है (कोल्हापुर की महालक्ष्मी, तुलजापुर की भवानी और माहूर की रेणुका के साथ) — हालाँकि मंदिर प्रशासन स्वयं इसे पूर्ण पीठ मानता है। यहाँ गिरे अंग को लेकर भी स्रोतों में मतभेद है: सामान्य शक्तिपीठ-सूचियाँ ठुड्डी बताती हैं, जबकि मंदिर से जुड़े विवरण दाहिनी भुजा का उल्लेख करते हैं।

    धार्मिक महत्व

    मंदिर तक पहुँचने के लिए पहले 510 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती थीं। जुलाई 2018 में शुरू हुई फ़्यूनिकुलर ट्रॉली अब यह चढ़ाई लगभग तीन मिनट में पूरी कर देती है और प्रतिदिन करीब पाँच हज़ार यात्रियों को ले जा सकती है; ट्रॉली स्टेशन से मंदिर तक 20-25 सीढ़ियाँ शेष रहती हैं। चैत्र मास में होने वाला **चैत्रोत्सव** यहाँ का सबसे बड़ा आयोजन है — राम नवमी से चैत्र पूर्णिमा तक चलने वाले इस उत्सव के अंतिम दिन लगभग ढाई लाख, और अंतिम तीन दिनों में मिलाकर लगभग दस लाख श्रद्धालु पहुँचते हैं। नवरात्रि में भी नौ दिन विशेष पूजा होती है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    सामान्यतः प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक; उत्सवों में समय बढ़ाया जाता है। फ़्यूनिकुलर ट्रॉली का समय अलग होता है, अतः यात्रा से पहले जाँच लें।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    नासिक शहर से मंदिर लगभग 60 किमी दूर है। नासिक से वणी-नंदुरी के लिए राज्य परिवहन की बसें और साझा टैक्सियाँ चलती हैं। मुंबई और पुणे से नासिक तक ट्रेन या बस, और आगे सड़क मार्ग सबसे व्यावहारिक विकल्प है।

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    सामान्य प्रश्न

    महाराष्ट्र की "साढ़े तीन शक्तिपीठ" परंपरा में कोल्हापुर, तुलजापुर और माहूर को पूर्ण पीठ तथा सप्तश्रृंगी को आधा पीठ माना जाता है। मंदिर प्रशासन स्वयं इसे पूर्ण पीठ मानता है।

    नहीं। 2018 से फ़्यूनिकुलर ट्रॉली उपलब्ध है, जो लगभग तीन मिनट में ऊपर पहुँचा देती है; उसके बाद केवल 20-25 सीढ़ियाँ बचती हैं।