सभी मंदिर

    शक्तिपीठ

    त्रिपुर सुंदरी मंदिर, उदयपुर

    उदयपुर, गोमती ज़िला, त्रिपुरा

    कछुए के आकार के टीले पर बना शक्तिपीठ, जिससे राज्य को अपना नाम मिला

    एक नज़र में

    स्थान
    उदयपुर, गोमती ज़िला, त्रिपुरा
    आराध्य
    देवी त्रिपुर सुंदरी (कूर्म पीठ)
    श्रेणी
    शक्तिपीठ
    परंपरा
    शाक्त
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    उदयपुर रेलवे स्टेशन (लगभग 3 किमी); अगरतला (लगभग 55 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डा, अगरतला (लगभग 60 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च; दीपावली का मेला यहाँ का सबसे बड़ा आयोजन है।

    इतिहास

    मंदिर त्रिपुरा के उदयपुर नगर में स्थित है और स्थानीय रूप से माताबाड़ी कहलाता है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में त्रिपुरा के महाराजा धन्य माणिक्य द्वारा करवाया गया माना जाता है। गर्भगृह जिस टीले पर बना है उसका आकार कछुए जैसा है, इसी कारण इसे कूर्म पीठ कहा जाता है।

    धार्मिक महत्व

    यह 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है; परंपरा के अनुसार यहाँ सती का दाहिना चरण गिरा था। गर्भगृह में देवी की दो प्रतिमाएँ हैं — बड़ी त्रिपुर सुंदरी और छोटी छोटी मा। मंदिर के निकट कल्याण सागर नामक बड़ा सरोवर है, जिसमें बड़ी मछलियाँ और कछुए हैं जिन्हें श्रद्धालु दाना खिलाते हैं। दीपावली पर यहाँ विशाल मेला लगता है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    मंदिर प्रातः से सायं तक खुला रहता है। दीपावली मेले और नवरात्रि में व्यवस्था अलग होती है।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    अगरतला से सड़क मार्ग द्वारा लगभग डेढ़ घंटे में पहुँचा जा सकता है और बस व टैक्सी नियमित चलती हैं। उदयपुर रेलवे स्टेशन से मंदिर कुछ ही किलोमीटर दूर है।

    माँ दुर्गा की भक्ति आगे बढ़ाएँ

    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    क्योंकि जिस टीले पर गर्भगृह बना है उसका आकार कछुए (कूर्म) जैसा है।

    त्रिपुरा नाम को परंपरा में देवी त्रिपुर सुंदरी से जोड़ा जाता है, यद्यपि नाम की व्युत्पत्ति पर अन्य मत भी हैं।