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    शक्तिपीठ

    विशालाक्षी शक्तिपीठ

    मीर घाट के निकट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

    काशी की शक्ति — जहाँ सती के कर्णकुंडल का मणि गिरा माना जाता है

    एक नज़र में

    स्थान
    मीर घाट के निकट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
    आराध्य
    देवी विशालाक्षी / मणिकर्णी (भैरव: कालभैरवेश्वर)
    श्रेणी
    शक्तिपीठ
    परंपरा
    शाक्त
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    वाराणसी जंक्शन (लगभग 5 किमी); बनारस (मंडुआडीह) स्टेशन (लगभग 7 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी (लगभग 25 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च। नवरात्रि और कजली तीज पर विशेष भीड़ रहती है।

    इतिहास

    परंपरा के अनुसार यहाँ सती के दाहिने कर्णकुंडल का **मणि** (मणिकर्ण) गिरा था, जिससे देवी को मणिकर्णी नाम भी मिला। मंदिर मीर घाट के पास, काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग 250 मीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। शक्तिपीठ-सूचियों में इसका स्थान ग्रंथ के अनुसार बदलता है: *देवी भागवत पुराण* में विशालाक्षी को 108 पीठों में **प्रथम** बताया गया है, *तंत्रचूड़ामणि* में 51 पीठों में 23वें क्रम पर, और कुछ परवर्ती सूचियाँ इसे उप-पीठ मानती हैं। वर्तमान मंदिर भवन 1893 में बना, और उन्नीसवीं शताब्दी से इसका निर्माण व रखरखाव तमिलनाडु के **नाट्टुकोट्टई नगरत्तार** व्यापारी समुदाय द्वारा किया जाता रहा है — इसीलिए इसकी स्थापत्य शैली में उत्तर भारतीय हवेली और दक्षिण भारतीय मंदिर, दोनों के तत्व दिखते हैं।

    धार्मिक महत्व

    काशी उन तीन स्थानों में से एक है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक साथ हैं — विश्वनाथ और विशालाक्षी। परंपरा में काशी विश्वनाथ के दर्शन के बाद विशालाक्षी के दर्शन को पूर्णता माना जाता है। यहाँ का मुख्य वार्षिक पर्व **कजली तीज** है, जो भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की तृतीया को पड़ता है और वर्षा ऋतु के अंत का प्रतीक है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    सामान्यतः प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (मध्याह्न में विराम संभव)।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    वाराणसी देश के हर बड़े शहर से ट्रेन और उड़ान से जुड़ा है। मंदिर विश्वनाथ गली के संकरे रास्तों में है, जहाँ वाहन नहीं जाते — गोदौलिया या दशाश्वमेध घाट तक ऑटो-रिक्शा से पहुँचकर आगे पैदल जाना पड़ता है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से यह कुछ मिनट की पैदल दूरी पर है।

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    सामान्य प्रश्न

    लगभग 250 मीटर उत्तर-पश्चिम में, मीर घाट के पास — कुछ मिनट की पैदल दूरी।

    क्योंकि परंपरा के अनुसार यहाँ सती के कर्णकुंडल का मणि गिरा था — "मणि" और "कर्ण" से मणिकर्णी।